शनिवार, 9 जुलाई 2016

बेलगाम बोल!



मीठे बोल बोलने वालों की प्रशंसा तो हर जगह होती है इसलिए कहा भी जाता है कि हमेशा मीठे शब्दों और वाक्यों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। हमारे धर्म ग्रंथों में भी मीठे बोल का उपदेश दिया गया है। समाज में प्रतिष्ठा बनाने के लिए और उसे कायम रखने के लिए बोली पर काबू रखना जरूरी होता है।
अपशब्द! अपशब्द!अपशब्द! की तो जैसे बहार सी आ गयी है जिधर देखों उधर अपशब्दों का बोलबाला है। सभ्य नागरिक के दायित्व को तो लोग जैसे भूलते जा रहे। देश में असहिष्णुता की चर्चा पिछले दिनों जमकर हुई..... इसके पीछे राजनीतिक मुद्दों पर तो सभी ने ध्यान दिया , लेकिन हम ये भूल गये कि अगर देश में वाकई अशांति का माहौल है तो इसके पीछे कहीं न कहीं बेलगाम बोली का ही हाथ है। आजकल माहौल कुछ इस तरह का हो गया है कि आम जनता हो या फिर देश के मानवीय नेता ही क्यों न हो …..सभी के सभी अपशब्दों के इस्तेमाल से जरा भी नहीं हिचकिचाते है। प्रतिदिन टीवी चैनलों और समाचार- पत्र के माध्यमों से नेताओं की बेलगाम बोली सामने आती है।
बेतुके और बेलगाम बोली की वजह से सुर्खियों में बने हुए नेताओं में से दिल्ली सरकार के मुख्यमंत्री का नाम कोई लेना भूल जाए ऐसा तो संभव ही नहीं हो सकता है। बकौल केजरीवाल लगातार अपनी बेलगाम बोली और तीखे तेवर की वजह से चर्चा में रहते है। अभी हाल ही में केजरीवाल ने पीएम मोदी को अपशब्द कहे लेकिन

शुक्रवार, 8 जुलाई 2016

ये क्या हो गया...

 इस्तीफा ! इस्तीफा ! इस्तीफा !  के स्वर तो राजनीति दलों का अटूट हिस्सा है। इन स्वरों के साथ स्मृति ईरानी का मानव संसाधन मंत्रालय का कार्यकाल समाप्त हो गया । ओह !  ये क्या कह दिया मैंनें अरे.... अरे...... कार्यकाल की अवधि समाप्त नहीं हुई बल्कि उनके हाथों से शिक्षा जैसे भारी भरकम  कार्य की जिम्मेदारी का बोझ कम कर दिया गया.......या यू कहिये कि उनके हाथों से देश के विकास में आने वाली पहली कड़ी को छीन लिया गया...... जी हां देश के विकास में शिक्षा का महत्व किसी से छिपा हुआ नहीं है। 
                         मैं बात कर रही हूँ अभी हाल ही में हुए केंद्रीय मंत्रीमंडल में फेरबदल की। जिसकी चर्चा पूरे देश में की जा रही है....... मंत्रीमंडल में फेरबदल ही नहीं हुआ बल्कि इसका विस्तार भी किया गया........मोदी के मंत्रीमंडल में विस्तार के तहत उन्नींस नए चेहरों को शामिल किया गया,,,,बतौर फेरबदल कुछ मंत्रियों का तो प्रमोशन हुआ तो कुछ का डिमोशन भी हुआ और तो और कुछ को बाहर का रास्ता भी दिखा दिया गया.....जिन मंत्रियों का डिमोशन हुआ है उनमें से स्मृति ईरानी की चर्चा जोरों से आरोप प्रत्यारोप के साथ की जा रही है। हो भी क्यों न उनके हाथों से शिक्षा जैसा पवित्र मंत्रालय छीन कर,, कपड़ा मंत्रालय में भेज दिया गया.........मंत्रालय में ऐसा बदलाव होगा ये तो स्मृति ने सोचा भी नहीं होगा....... 
                           बतौर शिक्षा मंत्री

रविवार, 3 जुलाई 2016

दहेज़ !

दहेज़ के रूप में दूसरे के बेटे को गाड़ी देने से बेहतर है कि अपने ही बेटे को गाड़ी दिला देनी चाहिए...ताकि दहेज़ के रूप में गाड़ी के लेन देन का प्रचलन खत्म हो जाये!