इस्तीफा ! इस्तीफा ! इस्तीफा ! के स्वर तो राजनीति दलों का अटूट हिस्सा है। इन स्वरों के साथ स्मृति ईरानी का मानव संसाधन मंत्रालय का कार्यकाल समाप्त हो गया । ओह ! ये क्या कह दिया मैंनें अरे.... अरे...... कार्यकाल की अवधि समाप्त नहीं हुई बल्कि उनके हाथों से शिक्षा जैसे भारी भरकम कार्य की जिम्मेदारी का बोझ कम कर दिया गया.......या यू कहिये कि उनके हाथों से देश के विकास में आने वाली पहली कड़ी को छीन लिया गया...... जी हां देश के विकास में शिक्षा का महत्व किसी से छिपा हुआ नहीं है।
मैं बात कर रही हूँ अभी हाल ही में हुए केंद्रीय मंत्रीमंडल में फेरबदल की। जिसकी चर्चा पूरे देश में की जा रही है....... मंत्रीमंडल में फेरबदल ही नहीं हुआ बल्कि इसका विस्तार भी किया गया........मोदी के मंत्रीमंडल में विस्तार के तहत उन्नींस नए चेहरों को शामिल किया गया,,,,बतौर फेरबदल कुछ मंत्रियों का तो प्रमोशन हुआ तो कुछ का डिमोशन भी हुआ और तो और कुछ को बाहर का रास्ता भी दिखा दिया गया.....जिन मंत्रियों का डिमोशन हुआ है उनमें से स्मृति ईरानी की चर्चा जोरों से आरोप प्रत्यारोप के साथ की जा रही है। हो भी क्यों न उनके हाथों से शिक्षा जैसा पवित्र मंत्रालय छीन कर,, कपड़ा मंत्रालय में भेज दिया गया.........मंत्रालय में ऐसा बदलाव होगा ये तो स्मृति ने सोचा भी नहीं होगा.......
बतौर शिक्षा मंत्री स्मृति ईरानी लगातार विवादों से घिरी हुई थी... फिर चाहे मामला दलित छात्र या फिर जेएनयू का ही क्यों न हो, अधिकांश मामले में स्मृति को विरोधों का सामना करना पड़ा था.…ये तो कुछ भी नहीं है खुद के शिक्षा पर भी लोगों की नाराजगी का सामना मैडम जी को करना पड़ा था.....विवादों से घिरी हुई ईरानी के तेवर भी कुछ कम नहीं थे.... संसद की कार्यवाही के दौरान तो स्मृति के तेवर से कोई अंजान नहीं होगा.... लेकिन मैडम जी हाथी के दांत खाने के कुछ और दिखाने के कुछ वाले सिद्धांत पर काम नहीं किया जाता है अन्यथा खामियाजा क्या होता है ये तो अब आप देख ही चुकी है।
स्मृति से मंत्रालय क्यों छिना गया इसके पीछे भी कई प्रकार की संभावना लगाई जा रही है। अटकलें तो ऐसी है कि कुछ राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए स्मृति को भारीभरकम जिम्मेदारी से मुक्त किया गया है ताकि वो चुनाव पर ध्यान दे सके। कुछ लोगों का मानना है कि बतौर शिक्षा मंत्री स्मृति ईरानी अपनी पद्वी को संभालने में नाकाम साबित हुई इसलिए उनको शिक्षा मंत्रालय से बाहर निकाल कर कपड़ा मंत्रालय में भेज दिया गया तो कुछ लोगों का ये भी मानना है कि उनको एक नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। संभावनाएं ऐसी भी लगाई जा रही है कि हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी से उनके रिश्ते खऱाब होने की वजह से उनको बाहर का रास्ता दिखाया गया। बहरहाल वजह चाहे कुछ भी क्यों न हो सच्चाई तो यही है कि शिक्षा मंत्री की पद्वी को संभालने में कहीं न कहीं स्मृति नाकाम रही। मानव संसाधन मंत्रालय में असमर्थ रही स्मृति के सामने अब नई चुनौती है कि वो किस से तरह से जनता में अपनी लोकप्रियता को बनाए।
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