रोहिंग्या समुदाय की चर्चा आज पूरे विश्व में हो रही है, हर कोई इन्हें दूसरे देश पर थोपना चाहता है, लेकिन कोई इन्हें अपनाना नहीं चाहता है। मसला इतना गरम हो गया है कि ये मुद्दा वैश्विक स्तर की चुनौती का रूप लेता नजर आ रहा है। खैर, मैं बात करूँगी कि आखिर रोहिंग्या को शरण हम क्यों नहीं दे सकते है? रोहिंग्या समुदाय पर मैं ज्यादा पीछे नहीं जाऊंगी, मैं सिर्फ उन कारणों पर बात करूँगी, जिसकी वजह से भारत चाहकर भी इस समुदाय को जगह नहीं दे सकता है, और अगर दे भी दिया तो समुदाय के साथ गद्दारी होगी क्योंकि वो हमारे यहां इस उम्मीद से आएंगे कि उनका जीवन खुशहाली से बीते।
भारत की सुरक्षा एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार रोहिंग्या समुदाय से देश को खतरा है।
केंद्र सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में यही दलील दी है कि रोहिंग्या देश के लिए खतरा है, हालांकि देश में इस समुदाय को शरण दिया जाना चाहिए या नहीं इस फैसला तो सुप्रीम कोर्ट ही करेगा। लेकिन सुरक्षा एजेंसी से लेकर गृहमंत्रालय तक यही कहता आ रहा है कि रोहिंग्या देश के लिए खतरा हैं, ये शरणार्थी नहीं, बल्कि घुसपैठिये है। इस मुद्दे पर सियासी संग्राम भी शुरू हो चुका है। जहाँ एक तरफ सरकार रोहिंग्या को शरण देने के पक्ष में नहीं है, तो वहीं दूसरी तरफ विपक्ष रोहिंग्या को असहाय और लाचार बताकर शरण देने के पक्ष में नजर आ रही है। इस मुद्दे पर देश दो भागों में बंट चुका है, कोई इस हिन्दू-मुस्लिम का मुद्दा बता रहा है तो कोई ह्यूमन राइट्स के तर्ज पर इस मुद्दे की समीक्षा कर रहा है! खैर, फिलहाल मैं बात करूँगी कि आखिर भारत के सामने ऐसी कौन सी चुनौतियां हैं, जिसकी वजह से रोहिंग्या समुदाय यहाँ नहीं रह सकता!
रोहिंग्या समुदाय को अगर भारत शरण देता है, तो उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती ये होगी कि भारत उन्हें खिलायेगा क्या, मतलब साफ है कि भारत की जनसंख्या इतनी ज्यादा है कि यहाँ आज भी 23 फीसदी लोग भुखमरी के शिकार हैं। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि जब हम अपना ही पेट नहीं भर पा रहे हैं तो दूसरों की जिम्मेदारी कैसें लें? हालांकि कुछ लोगों का कहना है कि इंसानियत के नाते रोहिंग्या को भारत में जगह दे देनी चाहिए, क्योंकि उन्हें काफी प्रताड़ना झेलनी पड़ी है और इस समय वो असहाय है। चलिये मानते है कि इंसानियत के नाते उन्हें यहां पनाह दे दें, लेकिन सवाल तो फिर वही खड़ा होता है कि आखिर उनको खिलाएंगे क्या ?
देश में हर साल भारी तादाद में युवा पढ़ाई करके रोजगार की तलाश में निकलते हैं, उनमें से रोजगार कितनों को मिलता है, इस बात से आप सभी भलीभांति परिचित होंगे। हमारे देश की तमाम बड़ी समस्याओं में से एक है बेरोजगारी! इस समस्या से देश कभी खुद को आजाद करा पाएगा या नहीं, ये तो वक्त ही बताएगा। मान लीजिये, रोहिंग्या समुदाय को पनाह दे दिया हमने, उनकी जनसंख्या लाखों में है, ऐसे में हम उन्हें रोजगार कहाँ से दे पाएंगे? और आप सभी जानते है कि पेट भरने के लिए रोजगार की जरूरत तो होती ही है, ऐसे में अपने देश के हालात को देख लेना चाहिए। अरे जनाब, वो कहावत तो आपने सुनी ही होगी कि 'घर फूंक तमाशा नहीं देखा करते है'। और यही कहावत आज देश पर लागू होती है, देश मे भारी तादाद में युवा बेरोजगार भटक रहे हैं, ऐसे में उन लाखों लोगों को हम कैसे बेहतर ज़िन्दगी दे सकते है ?
विकासशील देशों की तरह भारत में भी ये समस्या अभी तक बरकरार है, और आने वाले कुछ सालों में भी इस समस्या से छुटकारा मिलने वाला नहीं है। सयुंक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत में कुपोषण की समस्या सबसे ज्यादा है। कुपोषण का शिकार कोई तभी होता है, जब खान-पान सही से न हो, भारत की 23 फीसदी आबादी कुपोषण का शिकार है। कुपोषण क्यों है, क्योंकि देश मे गरीबी है, और गरीबी क्यों है, क्योंकि देश की जनसंख्या करोड़ों में है, ऐसे में उन लाखों लोगों को पनाह देकर, हमें उनकी ज़िंदगी के साथ खिलवाड़ खेलने का कोई अधिकार नहीं है।
हर बार की तरह इस बार भी इस मुद्दे पर वोट के लिए राजनीति का गंदा खेल-खेला जा रहा है। वोट बैंक के लिए देश की सुरक्षा को खतरें में डालना, कहाँ की समझदारी है। पहले कितनी बार देश का विभाजन हो चुका है, ऐसे में अब फिर से शरणार्थियों को जगह देकर विभाजन की तरफ क्यों बढ़ रहे है? चलिये मान लिया कि इनको पनाह दे दिया, लेकिन भविष्य में फिर किसी देश मे हिंसा हुई, और वहाँ के लोग भी भारत आकर शरण मांगेंगे, फिर से उन्हें शरण दिया जाएगा, इस तरह से देश की जनसंख्या कितनी बढ़ जाएगी और फिर हम इससे कैसे छुटकारा पाएंगे, ये तो सोचिए? रोहिंग्या मुद्दे पर एक बार फिर से देश हिन्दू मुस्लिम में बंट रहा है, हम फिर धर्म के नाम पर लड़ रहे हैं, लेकिन दोस्तों इन सबके बीच मुद्दा ये है कि आखिर हम धर्म के नाम पर कब तक यूं एक दूसरे से लड़ेंगे? वक्त आ गया है कि हम धर्म के बारे में न सोचकर देश के बारे में सोचें कि देश के लिए इस समुदाय को शरण देना कहाँ तक मुनासिफ है?
भारत की सुरक्षा एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार रोहिंग्या समुदाय से देश को खतरा है।
केंद्र सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में यही दलील दी है कि रोहिंग्या देश के लिए खतरा है, हालांकि देश में इस समुदाय को शरण दिया जाना चाहिए या नहीं इस फैसला तो सुप्रीम कोर्ट ही करेगा। लेकिन सुरक्षा एजेंसी से लेकर गृहमंत्रालय तक यही कहता आ रहा है कि रोहिंग्या देश के लिए खतरा हैं, ये शरणार्थी नहीं, बल्कि घुसपैठिये है। इस मुद्दे पर सियासी संग्राम भी शुरू हो चुका है। जहाँ एक तरफ सरकार रोहिंग्या को शरण देने के पक्ष में नहीं है, तो वहीं दूसरी तरफ विपक्ष रोहिंग्या को असहाय और लाचार बताकर शरण देने के पक्ष में नजर आ रही है। इस मुद्दे पर देश दो भागों में बंट चुका है, कोई इस हिन्दू-मुस्लिम का मुद्दा बता रहा है तो कोई ह्यूमन राइट्स के तर्ज पर इस मुद्दे की समीक्षा कर रहा है! खैर, फिलहाल मैं बात करूँगी कि आखिर भारत के सामने ऐसी कौन सी चुनौतियां हैं, जिसकी वजह से रोहिंग्या समुदाय यहाँ नहीं रह सकता!
रोहिंग्या समुदाय को अगर भारत शरण देता है, तो उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती ये होगी कि भारत उन्हें खिलायेगा क्या, मतलब साफ है कि भारत की जनसंख्या इतनी ज्यादा है कि यहाँ आज भी 23 फीसदी लोग भुखमरी के शिकार हैं। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि जब हम अपना ही पेट नहीं भर पा रहे हैं तो दूसरों की जिम्मेदारी कैसें लें? हालांकि कुछ लोगों का कहना है कि इंसानियत के नाते रोहिंग्या को भारत में जगह दे देनी चाहिए, क्योंकि उन्हें काफी प्रताड़ना झेलनी पड़ी है और इस समय वो असहाय है। चलिये मानते है कि इंसानियत के नाते उन्हें यहां पनाह दे दें, लेकिन सवाल तो फिर वही खड़ा होता है कि आखिर उनको खिलाएंगे क्या ?
देश में हर साल भारी तादाद में युवा पढ़ाई करके रोजगार की तलाश में निकलते हैं, उनमें से रोजगार कितनों को मिलता है, इस बात से आप सभी भलीभांति परिचित होंगे। हमारे देश की तमाम बड़ी समस्याओं में से एक है बेरोजगारी! इस समस्या से देश कभी खुद को आजाद करा पाएगा या नहीं, ये तो वक्त ही बताएगा। मान लीजिये, रोहिंग्या समुदाय को पनाह दे दिया हमने, उनकी जनसंख्या लाखों में है, ऐसे में हम उन्हें रोजगार कहाँ से दे पाएंगे? और आप सभी जानते है कि पेट भरने के लिए रोजगार की जरूरत तो होती ही है, ऐसे में अपने देश के हालात को देख लेना चाहिए। अरे जनाब, वो कहावत तो आपने सुनी ही होगी कि 'घर फूंक तमाशा नहीं देखा करते है'। और यही कहावत आज देश पर लागू होती है, देश मे भारी तादाद में युवा बेरोजगार भटक रहे हैं, ऐसे में उन लाखों लोगों को हम कैसे बेहतर ज़िन्दगी दे सकते है ?
विकासशील देशों की तरह भारत में भी ये समस्या अभी तक बरकरार है, और आने वाले कुछ सालों में भी इस समस्या से छुटकारा मिलने वाला नहीं है। सयुंक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत में कुपोषण की समस्या सबसे ज्यादा है। कुपोषण का शिकार कोई तभी होता है, जब खान-पान सही से न हो, भारत की 23 फीसदी आबादी कुपोषण का शिकार है। कुपोषण क्यों है, क्योंकि देश मे गरीबी है, और गरीबी क्यों है, क्योंकि देश की जनसंख्या करोड़ों में है, ऐसे में उन लाखों लोगों को पनाह देकर, हमें उनकी ज़िंदगी के साथ खिलवाड़ खेलने का कोई अधिकार नहीं है।
हर बार की तरह इस बार भी इस मुद्दे पर वोट के लिए राजनीति का गंदा खेल-खेला जा रहा है। वोट बैंक के लिए देश की सुरक्षा को खतरें में डालना, कहाँ की समझदारी है। पहले कितनी बार देश का विभाजन हो चुका है, ऐसे में अब फिर से शरणार्थियों को जगह देकर विभाजन की तरफ क्यों बढ़ रहे है? चलिये मान लिया कि इनको पनाह दे दिया, लेकिन भविष्य में फिर किसी देश मे हिंसा हुई, और वहाँ के लोग भी भारत आकर शरण मांगेंगे, फिर से उन्हें शरण दिया जाएगा, इस तरह से देश की जनसंख्या कितनी बढ़ जाएगी और फिर हम इससे कैसे छुटकारा पाएंगे, ये तो सोचिए? रोहिंग्या मुद्दे पर एक बार फिर से देश हिन्दू मुस्लिम में बंट रहा है, हम फिर धर्म के नाम पर लड़ रहे हैं, लेकिन दोस्तों इन सबके बीच मुद्दा ये है कि आखिर हम धर्म के नाम पर कब तक यूं एक दूसरे से लड़ेंगे? वक्त आ गया है कि हम धर्म के बारे में न सोचकर देश के बारे में सोचें कि देश के लिए इस समुदाय को शरण देना कहाँ तक मुनासिफ है?

Very nice line.....
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