मंगलवार, 21 मार्च 2017

आरक्षण का दायरा

आरक्षण! आरक्षण! आरक्षण! सिर्फ आरक्षण की ही गूंज देश में गूँज रही है फिर बात चाहे किसी भी प्रकार के आरक्षण की ही क्यों न की जाए। आज देश में हर किसी को आरक्षण चाहिए। किसी को जाति के आधार पर तो किसी को धर्म के आधार पर। आरक्षण का उचित दायरा क्या है, इसका निर्धारण कौन करेगा? संविधान में आरक्षण के लिए कई नियमों का उल्लेख किया गया है। आरक्षण पिछड़े समुदायों तथा अनुसूचित जातियों और जनजातियों को सामाजिक और शैक्षिक पिछड़ेपन से दूर करने के लिए दिया जाता है।


हाल ही में हो रहे जाट आंदोलनों की बात की जाए तो ये एक ऐसा समुदाय है, जिसमें लोगों के पास महँगी से महँगी गाड़ियां, महँगे से महँगे कपड़े, अच्छा-खासा घर है लेकिन फिर भी ये लोग आरक्षण की मांग कर रहे है। आंदोलन एक बार फिर शुरू हो गया है। पिछले साल हुए जाट आंदोलन में जाटों ने हिंसक रवैया अपनाया था। आंदोलन में कई लोगों की जान गई थी, इसके अलावा तोडफोड़ के कारण काफी नुकसान भी हुआ था। आरक्षण की आड़ में हिंसात्मक रवैया कहाँ तक उचित है? यहां कई सारे सवाल खड़े होते है, आंदोलन में मरने वाले लोगों का जिम्मेदार कौन? तोड़फाड़ में हुए नुकसान की भरपाई कौन करेगा? हद तो उस समय हो जाती है जब लोग ऑडी और बी.एम.डबल्यू जैसी लक्ज़री गाड़ियों से उतरकर आंदोलन का हिस्सा बनकर आरक्षण की मांग करते है। क्या ये लोग इस बार इस बात की जिम्मेदारी लेंगे कि इस बार आंदोलन में किसी प्रकार तोडफोड़ या हिंसा नहीं की जाएगी?

मंगलवार, 14 मार्च 2017

ईवीएम पर बवाल!


यूपी के सोलहवीं विधानसभा चुनाव के नतीजे पर सवाल उठने लगे है। नतीजे पर सबसे पहले सवाल बसपा सुप्रीमो मायावती ने उठाते हुए कहा कि ईवीएम में खराबी है,इसकी जांच होनी चाहिए! इतना ही नहीं उन्होंने चुनाव आयोग से आग्रह किया कि चुनाव के लिए बैलेट पेपर का इस्तेमाल करके दोबारा चुनाव कराया जाये। बहरहाल आयोग ने मायावती के आरोपों को बेबुनियाद करारते हुए मामला को ख़ारिज कर दिया। बसपा सुप्रीमो मायावती के साथ समस्त विरोधी पार्टी सुर में सुर मिलाते नजर आ रहे है।

            ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब ईवीएम में गड़बड़ी की आशंका जताई गई हो। इतिहास के पन्नों पर अगर गौर किया जाये तो 2009 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने कांग्रेस पर आरोप लगाया था कि उसने ईवीएम से छेड़खानी की। 2009 के चुनाव में तो विरोधी पार्टी यानि बीजेपी के दो दिग्गज नेताओं ने ईवीएम की गड़बड़ी पर बाकायदा पुस्तक लिख डाली थी। पुस्तक का शीर्षक था कि democracy at risk/can we trust our electronic machine? इस पुस्तक में ईवीएम के धोखाधड़ी का खुलासा किया गया है। ईवीएम पर सवाल खड़े करना कहाँ तक उचित है या फिर सीधे-सीधे लोकतंत्र की प्रणाली पर सवाल उठाना कितना सही है? क्या वाकई ईवीएम घोटाला हो सकता है या फिर करारी शिकस्त से विरोधी पार्टियां खिसियानी बिल्ली की तरह बौखला जाती है?

यूपी में कमल खिला

यूपी के चुनावी दंगल में बीजेपी को ऐतिहासिक जीत मिली। इस बार यूपी के विधानसभा चुनाव में न सिर्फ बम्पर वोटिंग हुई अपितु ऐतिहासिक नतीजा भी सामने आया। सोलहवीं विधानसभा चुनाव में बीजेपी और उसके गठबंधन ने 403 में से 325 सीटों पर जीत हासिल किया। इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही बीजेपी ने यूपी में अपना सूखापन दूर कर लिया। खैर ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि यूपी जैसे बड़े राज्य में किसी पार्टी ने इतनी बड़ी जीत हासिल की हो। इतिहास के पन्नो पर अगर गौर किया जाये तो बीजेपी से पहले कई पार्टियों ने 300 से ज्यादा सीटें जीती थी।

वैसे तो हर बार यूपी का चुनावी नतीजा चौकाने वाला ही आता है;लेकिन इस बार का नतीजा इसलिए खास बन जाता है क्योंकि जीत हासिल करने वाली पार्टी यानि बीजेपी को भी अपनी इतनी बड़ी जीत की उम्मीद नहीं थी। इस बार का चुनाव इसलिए भी खास रहा क्योंकि देश के पीएम ने चुनाव में अपनी आन-बान-शान झोंक दी थी। इस चुनाव में तमाम बुद्धजीवियों का गणित भी असफल हो गया। चुनावी नतीजा ने यूपी की रुपरेखा ही बदलकर रख दी। यूपी की जनता ने न सिर्फ परम्पराओं को तोड़ा बल्कि उन सभी को मुहं तोड़ जवाब दिया;जो कहते थे यूपी की राजनीती परम्परावादी है।।खैर अब तो यूपी की राजगद्दी पर अगले पांच सालों तक बीजेपी ही विराजमान रहेगी।

रविवार, 12 मार्च 2017

होलिका दहन

घर में बच्चे फ़ोन और कंप्यूटर पर लगे हुए हैे,,इतने में ही घर के आंगन से बूढी दादी के चिल्लाने की आवाज आई कि 'अरे कम्बख्तों रोज तो घुसे ही रहते हो इस डिब्बे में, आँख फुट जायेगी। जरा भी लाज-शर्म बची हो तो बाहर आ जाओ पता है न कि कल क्या है'।
अंदर से रामू झल्लाता हुए बोला 'अरे दादी आप भी न, परेशान मत कीजिये,होगा जो भी होगा, हमे क्या लेना देना।' इतना कहता हुआ रामू फिर कंप्यूटर में घुस गया!

ये सुनते ही दादी का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया....दादी गुस्से में अरे वो ये डिब्बा ही सारा जीवन काम न आएगा..जल्दी बाहर आओ....
दादी की बात का मान रखते हुए बच्चे बाहर आये और बोले की दादी जल्दी से बताओ कल क्या है,,, फेसबुक पर पिक पोस्ट की है,दोस्त लाइक और कमेंट कर रहे होंगे!
(ये सुनते ही दादी ने मन ही मन ये तय किया कि इन बच्चों को इनके ही अंदाज में समझाना होगा)
दादी ने कहा रामू-पिंकी तुम दोनों को फेसबुक पर वो क्या कहते है(दादी याद करते हुए शब्द को) तुम्हारी भाषा में पिक पोस्ट करना अच्छा लगता है न...दोनों ने कहा 'हाँ दादी बहुत अच्छा लगता है हमारा बस चले तो पूरे दिन पिक पोस्ट करते रहे'...(दोनों फेसबुक का गुणगान गाने में डूब गए)
दादी (प्रसन्न मन से) दोनों को चुप कराती हुई कि अरे चुप भी हो जाओ कम्बख्तों,जान खा रखी है, अब जो मैं कहने जा रही हूँ उसे ध्यान से सुनो! (दोनों मौन हो गए)
दादी दोनों के सर पर हाथ फेरते हुये बोली कि 'कल होलिका दहन है'।
ये सुनकर दोनों चौक गये बोले कि 'दादी ये क्या होता है,हम तो बस होली के बारे में ही जानते है।'
दादी (मुस्कुराती हुई) होलिका दहन के महत्व  को समझाते हुए बोली कि 'भोर में जगकर हम होलिका दहन में जाएंगे'
ये सुनते ही दोनों दुखी हो गए और बोले 'दादी कौन उठता है इतनी सुबह, जब तो हमारे सोने का टाइम होता है और आप उठने के लिए बोल रही है, नॉट फेयर दादी।'(दोनों कमरे की ओर जाने लगे)
इतने में दादी बोल पड़ी कि 'अरे मेरे दिल के टुकड़ों असली बात तो बताई ही नही मैंने'
दोनों के बढ़ते कदम रुक गये बोले कि 'अब क्या है दादी,इतना तो बोर हो चुके है हम,और कितना होना बाकी है!'
दादी (मंद स्वर में) बोली कि 'होलिका दहन पर पिक क्लिक करेंगे,जिसे तुम दोनों अपने फेसबुक पर पोस्ट कर सकोगे, सारे दोस्त बहुत लाइक करेंगे,बहुत वाहवाही होगी'।
दोनों की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा बोले 'दादी, क्या बोला आपने वहां सेल्फी ले सकते है हम'
दादी बोली 'हाँ बच्चो'....बच्चे फ़ोन में सुबह का एलार्म लगा कर सोने चले गए!
(भोर का समय)
ट्रिंग ट्रिंग....की सुनहरी आवाज में एलार्म बजा...
(दोनों जग गये) दादी दादी कहा हो आप ये चिल्लाते हुए दोनों कमरे से बाहर आ गए....'दादी जल्दी चलो,वरना हम लेट हो जायेंगे,फिर हमसे पहले कोई और फेसबुक पर पिक पोस्ट कर देगा'... दादी अरे मैं यही हूँ मेरे बच्चों चलो.....
(घर से थोड़ी ही दूर पर होलिका दहन का कार्यक्रम) रास्ते भर मटरगस्ती करते हुए दोनो यही बात कर रहे थे कि 'आज तो फेसबुक पर हमारा ही क्रेज होगा'
(होलिका दहन के स्थान पर पहुँचे)
दादी ने दोनों को होलिका दहन की विधि बताई,,,, दोनों ने पूजा अर्चना की...उसके बाद ढेर सारी तस्वीरे खीची...
पिंकी बोली दादी आज तो मजा आ गया अब तो मैं अपने सारे फ्रेंड्स को बताऊंगी होलिका दहन के बारे में...अब से हम हर होलिका दहन पर आएंगे क्यों रामू भैया...रामू ने बोला 'हाँ दादी, आई लव यू दादी, यू आर द बेस्ट इन वर्ल्ड'
बच्चो को ख़ुशी देख,दादी मन ही मन मुस्कुराई और बोली कि 'जिस तरह से तुम दोनों मेरी बात समझ गए वैसे ही अगर सभी बच्चे समझ जाए,तो हमारी परम्पराये सुरक्षित रहेंगी','आज मेरा जीवन सुफल हो गया'।

मंगलवार, 7 मार्च 2017

महिला दिवस स्पेशल


आज फिर मंच सजा है। लंबे-लंबे व्याख्यान हो रहे है, बड़ी-बड़ी बातें हो रही है,महिला सशक्तिकरण की। योजनाओं की घोषणाएं हो रही है, तालियां बज रही है,मीडिया कवर कर रही है- ये सब देख रही है शारदा
(गांव की रहने वाली शारदा ये सब देखकर बहुत ही दुविधा में पड़ गयी और सोचने लग गई कि क्या वाकई आज की महिला आजाद है, मैं भी पापा को जाकर बोलती हूँ कि मुझे स्कूल जाना है।)
शारदा दौड़ी-दौड़ी गई और पापा से बोली कि 'आज महिला दिवस है।
पापा ने कहा 'हाँ'
शारदा ने मासूमियत भरी आवाज में कहा कि पापा वो शहर के कुछ बड़े-बड़े लोग आये है, महिलाओं की आजादी की बात कर रहे है और कह रहे है कि आज की महिला अपने फैसले लेने के लिए आजाद है। ये सुनकर पापा बोले कि बिटिया वो अपने मतलब की बात नहीं है, तू जाकर अपना काम कर। शारदा बोली 'पापा मुझे भी स्कूल जाना है, भाई के जैसे पढ़कर आपका नाम रोशन करना है।' शारदा की बात सुनकर पापा का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया और बोले कि 'चुपकर छोरी ये क्या बोल रही है तू,तेरा दिमाग घास चरने गया है क्या, छोरिया घर में ही अच्छी लगती है।'
(पापा की बात सुनकर शारदा रोने लगी और दौड़कर उसी जगह गई जहां मंच सजा है)
शारदा चिल्लाकर बोली 'बन्द कीजिये ये तमाशा बहुत हो गई आपकी बड़ी-बड़ी बातें, क्या फायदा आपके इन बातों का, जब आज भी मुझ जैसी हजारों लड़कियां स्कूल नहीं जा पाती है।'
(शारदा के सवालों का जवाब मंच पर मौजूद किसी के पास नहीं,सब मौन हो गए)
शारदा फिर बोली कि 'आप लोगों की तो आज बहुत तारीफे होगी, पुरस्कार मिलेंगे, खूब वाहवाही होगी, लेकिन क्या आप लोगों ने कभी जमीनी स्तर पर काम करने के बारे में सोचा है, नहीं सोचा न?  अगर सोचते तो आज आप यहां मंच पर खड़े होकर भाषण देने के बजाय मुझ जैसी लड़कियों को स्कूल भेजने का काम करते।'
(शारदा की बहादुरी को देखकर लोगों ने जमकर तालियां बजाई)
शारदा की बात को सुनकर मंच से एक बुद्धजीवी बोले कि बेटा तू सही बोल रही है, आज हमें अपनी गलती का एहसास हुआ अब से हम जमीनी स्तर पर ही काम करेंगे और तुम जैसी लड़कियों को स्कूल तक पंहुचा कर ही रहेंगे।
(बुद्धजीवी की बात सुनकर तालियां बजने लगी)
शारदा के पापा ये सब देख रहे थे उन्होंने बोला कि 'मुझे माफ़ कर दो बेटी, आज से तुम स्कूल जाओगी'
शारदा बोली 'सच्ची पापा, मैं स्कूल जाऊंगी और पढूंगी?'
पापा-'हाँ बेटा'
शारदा पापा से बोली कि 'आज मैं तो स्कूल जा पाऊँगी, लेकिन अब भी कुछ लड़कियां है जो  स्कूल नहीं जा पा रही है, अगर वो भी स्कूल जाने लगेंगी, तो सही मायने में महिला दिवस का उद्देश्य पूरा होगा।'
(शारदा की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा और वो हंसती-मुस्कुराती घर गई)