आरक्षण! आरक्षण! आरक्षण! सिर्फ आरक्षण की ही गूंज देश में गूँज रही है
फिर बात चाहे किसी भी प्रकार के आरक्षण की ही क्यों न की जाए। आज देश में
हर किसी को आरक्षण चाहिए। किसी को जाति के आधार पर तो किसी को धर्म के आधार
पर। आरक्षण का उचित दायरा क्या है, इसका निर्धारण कौन करेगा? संविधान में
आरक्षण के लिए कई नियमों का उल्लेख किया गया है। आरक्षण पिछड़े समुदायों
तथा अनुसूचित जातियों और जनजातियों को सामाजिक और शैक्षिक पिछड़ेपन से दूर
करने के लिए दिया जाता है।
हाल ही में हो रहे जाट आंदोलनों की बात की जाए तो ये एक ऐसा समुदाय है, जिसमें लोगों के पास महँगी से महँगी गाड़ियां, महँगे से महँगे कपड़े, अच्छा-खासा घर है लेकिन फिर भी ये लोग आरक्षण की मांग कर रहे है। आंदोलन एक बार फिर शुरू हो गया है। पिछले साल हुए जाट आंदोलन में जाटों ने हिंसक रवैया अपनाया था। आंदोलन में कई लोगों की जान गई थी, इसके अलावा तोडफोड़ के कारण काफी नुकसान भी हुआ था। आरक्षण की आड़ में हिंसात्मक रवैया कहाँ तक उचित है? यहां कई सारे सवाल खड़े होते है, आंदोलन में मरने वाले लोगों का जिम्मेदार कौन? तोड़फाड़ में हुए नुकसान की भरपाई कौन करेगा? हद तो उस समय हो जाती है जब लोग ऑडी और बी.एम.डबल्यू जैसी लक्ज़री गाड़ियों से उतरकर आंदोलन का हिस्सा बनकर आरक्षण की मांग करते है। क्या ये लोग इस बार इस बात की जिम्मेदारी लेंगे कि इस बार आंदोलन में किसी प्रकार तोडफोड़ या हिंसा नहीं की जाएगी?
हाल ही में हो रहे जाट आंदोलनों की बात की जाए तो ये एक ऐसा समुदाय है, जिसमें लोगों के पास महँगी से महँगी गाड़ियां, महँगे से महँगे कपड़े, अच्छा-खासा घर है लेकिन फिर भी ये लोग आरक्षण की मांग कर रहे है। आंदोलन एक बार फिर शुरू हो गया है। पिछले साल हुए जाट आंदोलन में जाटों ने हिंसक रवैया अपनाया था। आंदोलन में कई लोगों की जान गई थी, इसके अलावा तोडफोड़ के कारण काफी नुकसान भी हुआ था। आरक्षण की आड़ में हिंसात्मक रवैया कहाँ तक उचित है? यहां कई सारे सवाल खड़े होते है, आंदोलन में मरने वाले लोगों का जिम्मेदार कौन? तोड़फाड़ में हुए नुकसान की भरपाई कौन करेगा? हद तो उस समय हो जाती है जब लोग ऑडी और बी.एम.डबल्यू जैसी लक्ज़री गाड़ियों से उतरकर आंदोलन का हिस्सा बनकर आरक्षण की मांग करते है। क्या ये लोग इस बार इस बात की जिम्मेदारी लेंगे कि इस बार आंदोलन में किसी प्रकार तोडफोड़ या हिंसा नहीं की जाएगी?




