यूपी के चुनावी दंगल में बीजेपी को ऐतिहासिक जीत मिली। इस बार यूपी के विधानसभा चुनाव में न सिर्फ बम्पर वोटिंग हुई अपितु ऐतिहासिक नतीजा भी सामने आया। सोलहवीं विधानसभा चुनाव में बीजेपी और उसके गठबंधन ने 403 में से 325 सीटों पर जीत हासिल किया। इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही बीजेपी ने यूपी में अपना सूखापन दूर कर लिया। खैर ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि यूपी जैसे बड़े राज्य में किसी पार्टी ने इतनी बड़ी जीत हासिल की हो। इतिहास के पन्नो पर अगर गौर किया जाये तो बीजेपी से पहले कई पार्टियों ने 300 से ज्यादा सीटें जीती थी।
वैसे तो हर बार यूपी का चुनावी नतीजा चौकाने वाला ही आता है;लेकिन इस बार का नतीजा इसलिए खास बन जाता है क्योंकि जीत हासिल करने वाली पार्टी यानि बीजेपी को भी अपनी इतनी बड़ी जीत की उम्मीद नहीं थी। इस बार का चुनाव इसलिए भी खास रहा क्योंकि देश के पीएम ने चुनाव में अपनी आन-बान-शान झोंक दी थी। इस चुनाव में तमाम बुद्धजीवियों का गणित भी असफल हो गया। चुनावी नतीजा ने यूपी की रुपरेखा ही बदलकर रख दी। यूपी की जनता ने न सिर्फ परम्पराओं को तोड़ा बल्कि उन सभी को मुहं तोड़ जवाब दिया;जो कहते थे यूपी की राजनीती परम्परावादी है।।खैर अब तो यूपी की राजगद्दी पर अगले पांच सालों तक बीजेपी ही विराजमान रहेगी।
लगभग 19.3 प्रतिशत वाले मुस्लिम आबादी के क्षेत्र में बीजेपी की बड़ी जीत उन सभी पर बड़ा सवाल खड़ा कर देती है जो कहते थे कि मुस्लिम समुदाय बीजेपी को कभी वोट नहीं देती है! मुस्लिम समुदाय को लेकर यूपी के चुनाव में तमाम सवाल खड़े होते है। यहां सवाल ये खड़ा होता है कि जब मुस्लिम समुदाय बीजेपी को वोट नहीं देती है तो यूपी में बीजेपी की इतनी बड़ी जीत कैसे हो गई? इस सवाल का जवाब शीशे की तरह साफ़ है कि इस बार मुस्लिम समुदाय ने विकास की राह को चुना। तीन तलाक का जुमला बीजेपी के लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं हुआ वरना जो बीजेपी चुनाव के दौरान सम्प्रदायवाद की राजनीति करती नजर आ रही थी उसको इतनी बड़ी जीत नसीब नहीं होती। बीजेपी की जीत में पीएम मोदी का रोड शो और उनके तमाम जुमले ने वरदान जैसा काम किया। किसानों का कर्ज,मां गंगा,तीन तलाक समेत कई मुद्दों की बदौलत यूपी ने बीजेपी को सर-आँखों पर बिठा लिया। बीजेपी की जीत में उसके कार्यकर्ताओं का जमीनीस्तर पर काम करना भी एक अहम भूमिका रही। खैर बात चाहे जो भी हो पीएम मोदी का जादू चला और यूपी की दंगल गाड़ी में बीजेपी सवार हो गई।
बीजेपी की जीत से विरोधी पार्टी पूरी तरह से बौखला गई है,बसपा सुप्रीमो मायावती ने तो ईवीएम पर ही सवाल खड़े कर दिए। मायावती का कहना है कि ईवीएम में गड़बड़ी होने की वजह से बीजेपी को इतनी बड़ी जीत मिली है। मायावती के बाद ईवीएम की गड़बड़ी पर अन्य विरोधी पार्टियों ने भी सवाल खड़े कर दिए। चुनाव के नतीजे आने से पहले जो विरोधी दल एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप करते नजर आ रहे थे वो अब सुर में सुर मिलाकर कह रहे है कि ईवीएम में खराबी है। खैर ये तो राजनीति का ही खेल है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि जब किसी पार्टी ने चुनाव हारने पर ईवीएम पर सवाल खड़े कर दिए हो। आपको याद दिला दूँ कि 2009 में कांग्रेस के चुनाव जीतने पर बीजेपी के कई दिग्गज नेताओं ने ईवीएम में गड़बड़ी की बात कही थी।
चुनावी नतीजा साफ़ जाहिर करता है कि इस बार यूपी की जनता की उम्मीद नवीन सत्ताधारी पार्टी से बहुत ज्यादा है। विकास के नाम पर जिस तरह से वोटिंग जमकर हुई है,ठीक उसी तरह से यूपी की जनता विकास की उम्मीद रख रही है। चुनावी महासंग्राम में महारथ हासिल करने वाली बीजेपी के लिए ये कार्यकाल बहुत ही चुनोतीपूर्ण होगा! बीजेपी के लिए यूपी का विकास करना सबसे बड़ी चुनौती है,क्योंकि अगर यूपी का विकास नहीं हुआ तो साहब आपका भी हश्र वही होगा,जो इस चुनाव में सपा का हुआ है। जहां एक तरफ बीजेपी की नजर आगामी लोकसभा चुनाव पर है वहीं दूसरी तरफ यूपी में अपनी राजगद्दी को बचाकर रखना भी उसके लिए किसी चुनौती से कम नहीं होगा!
वैसे तो हर बार यूपी का चुनावी नतीजा चौकाने वाला ही आता है;लेकिन इस बार का नतीजा इसलिए खास बन जाता है क्योंकि जीत हासिल करने वाली पार्टी यानि बीजेपी को भी अपनी इतनी बड़ी जीत की उम्मीद नहीं थी। इस बार का चुनाव इसलिए भी खास रहा क्योंकि देश के पीएम ने चुनाव में अपनी आन-बान-शान झोंक दी थी। इस चुनाव में तमाम बुद्धजीवियों का गणित भी असफल हो गया। चुनावी नतीजा ने यूपी की रुपरेखा ही बदलकर रख दी। यूपी की जनता ने न सिर्फ परम्पराओं को तोड़ा बल्कि उन सभी को मुहं तोड़ जवाब दिया;जो कहते थे यूपी की राजनीती परम्परावादी है।।खैर अब तो यूपी की राजगद्दी पर अगले पांच सालों तक बीजेपी ही विराजमान रहेगी।
लगभग 19.3 प्रतिशत वाले मुस्लिम आबादी के क्षेत्र में बीजेपी की बड़ी जीत उन सभी पर बड़ा सवाल खड़ा कर देती है जो कहते थे कि मुस्लिम समुदाय बीजेपी को कभी वोट नहीं देती है! मुस्लिम समुदाय को लेकर यूपी के चुनाव में तमाम सवाल खड़े होते है। यहां सवाल ये खड़ा होता है कि जब मुस्लिम समुदाय बीजेपी को वोट नहीं देती है तो यूपी में बीजेपी की इतनी बड़ी जीत कैसे हो गई? इस सवाल का जवाब शीशे की तरह साफ़ है कि इस बार मुस्लिम समुदाय ने विकास की राह को चुना। तीन तलाक का जुमला बीजेपी के लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं हुआ वरना जो बीजेपी चुनाव के दौरान सम्प्रदायवाद की राजनीति करती नजर आ रही थी उसको इतनी बड़ी जीत नसीब नहीं होती। बीजेपी की जीत में पीएम मोदी का रोड शो और उनके तमाम जुमले ने वरदान जैसा काम किया। किसानों का कर्ज,मां गंगा,तीन तलाक समेत कई मुद्दों की बदौलत यूपी ने बीजेपी को सर-आँखों पर बिठा लिया। बीजेपी की जीत में उसके कार्यकर्ताओं का जमीनीस्तर पर काम करना भी एक अहम भूमिका रही। खैर बात चाहे जो भी हो पीएम मोदी का जादू चला और यूपी की दंगल गाड़ी में बीजेपी सवार हो गई।
बीजेपी की जीत से विरोधी पार्टी पूरी तरह से बौखला गई है,बसपा सुप्रीमो मायावती ने तो ईवीएम पर ही सवाल खड़े कर दिए। मायावती का कहना है कि ईवीएम में गड़बड़ी होने की वजह से बीजेपी को इतनी बड़ी जीत मिली है। मायावती के बाद ईवीएम की गड़बड़ी पर अन्य विरोधी पार्टियों ने भी सवाल खड़े कर दिए। चुनाव के नतीजे आने से पहले जो विरोधी दल एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप करते नजर आ रहे थे वो अब सुर में सुर मिलाकर कह रहे है कि ईवीएम में खराबी है। खैर ये तो राजनीति का ही खेल है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि जब किसी पार्टी ने चुनाव हारने पर ईवीएम पर सवाल खड़े कर दिए हो। आपको याद दिला दूँ कि 2009 में कांग्रेस के चुनाव जीतने पर बीजेपी के कई दिग्गज नेताओं ने ईवीएम में गड़बड़ी की बात कही थी।
चुनावी नतीजा साफ़ जाहिर करता है कि इस बार यूपी की जनता की उम्मीद नवीन सत्ताधारी पार्टी से बहुत ज्यादा है। विकास के नाम पर जिस तरह से वोटिंग जमकर हुई है,ठीक उसी तरह से यूपी की जनता विकास की उम्मीद रख रही है। चुनावी महासंग्राम में महारथ हासिल करने वाली बीजेपी के लिए ये कार्यकाल बहुत ही चुनोतीपूर्ण होगा! बीजेपी के लिए यूपी का विकास करना सबसे बड़ी चुनौती है,क्योंकि अगर यूपी का विकास नहीं हुआ तो साहब आपका भी हश्र वही होगा,जो इस चुनाव में सपा का हुआ है। जहां एक तरफ बीजेपी की नजर आगामी लोकसभा चुनाव पर है वहीं दूसरी तरफ यूपी में अपनी राजगद्दी को बचाकर रखना भी उसके लिए किसी चुनौती से कम नहीं होगा!

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