रविवार, 3 जुलाई 2016

दहेज़ !

दहेज़ के रूप में दूसरे के बेटे को गाड़ी देने से बेहतर है कि अपने ही बेटे को गाड़ी दिला देनी चाहिए...ताकि दहेज़ के रूप में गाड़ी के लेन देन का प्रचलन खत्म हो जाये!

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