मीठे बोल बोलने वालों की प्रशंसा तो हर जगह होती है इसलिए कहा भी जाता है कि हमेशा मीठे शब्दों और वाक्यों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। हमारे धर्म ग्रंथों में भी मीठे बोल का उपदेश दिया गया है। समाज में प्रतिष्ठा बनाने के लिए और उसे कायम रखने के लिए बोली पर काबू रखना जरूरी होता है।
अपशब्द! अपशब्द!अपशब्द! की तो जैसे बहार सी आ गयी है जिधर देखों उधर अपशब्दों का बोलबाला है। सभ्य नागरिक के दायित्व को तो लोग जैसे भूलते जा रहे। देश में असहिष्णुता की चर्चा पिछले दिनों जमकर हुई..... इसके पीछे राजनीतिक मुद्दों पर तो सभी ने ध्यान दिया , लेकिन हम ये भूल गये कि अगर देश में वाकई अशांति का माहौल है तो इसके पीछे कहीं न कहीं बेलगाम बोली का ही हाथ है। आजकल माहौल कुछ इस तरह का हो गया है कि आम जनता हो या फिर देश के मानवीय नेता ही क्यों न हो …..सभी के सभी अपशब्दों के इस्तेमाल से जरा भी नहीं हिचकिचाते है। प्रतिदिन टीवी चैनलों और समाचार- पत्र के माध्यमों से नेताओं की बेलगाम बोली सामने आती है।
बेतुके और बेलगाम बोली की वजह से सुर्खियों में बने हुए नेताओं में से दिल्ली सरकार के मुख्यमंत्री का नाम कोई लेना भूल जाए ऐसा तो संभव ही नहीं हो सकता है। बकौल केजरीवाल लगातार अपनी बेलगाम बोली और तीखे तेवर की वजह से चर्चा में रहते है। अभी हाल ही में केजरीवाल ने पीएम मोदी को अपशब्द कहे लेकिन
ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब केजरीवाल ने अपने तीखे शब्दों के बाण पीएम पर चलाए हो....पहले केजरीवाल ने पीएम मोदी को कायर आदि कहा था तो इस बार उन्होंने गुंडें जैसे अपशब्द का इस्तोमाल किया ….¸केजरीवाल लगातार हो रहे विधायकों की गिरफ्तारी से बौखला गये है.......उन्होंने कहा कि "ये तो अच्छा है कि मेरे विधायक दिल्ली के है ,गुजरात के नहीं वर्ना तो अभी तक मेरे एक विधायक भी जिंदा नहीं बचते....ये लोग गुंडों की तरह हमारे पीछे पड़े हुए है तो इन्हें गुंडा न कहा जाए तो क्या कहा जाए"....... माना कि देश में अभिव्यक्ति की आजादी है....सभी को बोलने का अधिकार है लेकिन ये अधिकार कहां तक सीमित है इसे कौन तय करेगा क्योंकि संविधान के द्वारा बनाए गए सीमाओं को तो हम भूल चुके है ….तभी तो आजकल चाहें आम जनता हो या फिर देश के मानवीय सदस्य ही क्यों न हो... अभिव्यक्ति के दायरे को सभी फांदते नजर आ रहे है।
ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब केजरीवाल ने अपने तीखे शब्दों के बाण पीएम पर चलाए हो....पहले केजरीवाल ने पीएम मोदी को कायर आदि कहा था तो इस बार उन्होंने गुंडें जैसे अपशब्द का इस्तोमाल किया ….¸केजरीवाल लगातार हो रहे विधायकों की गिरफ्तारी से बौखला गये है.......उन्होंने कहा कि "ये तो अच्छा है कि मेरे विधायक दिल्ली के है ,गुजरात के नहीं वर्ना तो अभी तक मेरे एक विधायक भी जिंदा नहीं बचते....ये लोग गुंडों की तरह हमारे पीछे पड़े हुए है तो इन्हें गुंडा न कहा जाए तो क्या कहा जाए"....... माना कि देश में अभिव्यक्ति की आजादी है....सभी को बोलने का अधिकार है लेकिन ये अधिकार कहां तक सीमित है इसे कौन तय करेगा क्योंकि संविधान के द्वारा बनाए गए सीमाओं को तो हम भूल चुके है ….तभी तो आजकल चाहें आम जनता हो या फिर देश के मानवीय सदस्य ही क्यों न हो... अभिव्यक्ति के दायरे को सभी फांदते नजर आ रहे है।
आज समय आ गया है कि कबीर, तुलसी आदि के दोहो को अपने जह़न में उतारने का। केजरीवाल जी बेलगाम बोली से सिर्फ आपकी ही नहीं बल्कि पूरे देश में दिल्ली की छवि कमजोर पड़ती नजर आ रही है क्योंकि आपने तो सुना ही होगा कि शासक का प्रभाव प्रजा बहुत गहरा पड़ता है । केजरीवाल जी जितना ध्यान आप अपने बेलगाम बोली पर लगाते है उतना ही ध्यान आप दिल्ली के विकास पर दें तो शायद आम आदमी का भला हो जाएगा.....

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें