पूर्व राष्ट्रपति डॉ अब्दुल कलाम सिर्फ राष्ट्रपति ही नहीं बल्कि देश के सर्वोच्च पुरस्कार से भी सम्मानित है। कलाम साहेब आज हमारे बीच में नहीं है, लेकिन फिर भी उनके होने का एहसास पूरे देश को है।
15 अक्टूबर, 1931 को रामेश्वरम में जन्में कलाम तकदीर पर भरोसा न करके मेहनत पर भरोसा किया। यही कारण है कि आज कलाम देश के लिए प्रेरणा स्त्रोत है।
डॉ कलाम को मिसाइल मैन के नाम से भी जाना जाता है। कलाम को लोगों से मिलना बहुत अच्छा लगता था, यही कारण है कि जब भी कोई उनसे मिलना चाहता था वो इंकार नहीं करते थे। डॉ कलाम न सिर्फ एक अच्छे वैज्ञानिक थे, बल्कि उनमें इंसानियत भी कूट कूट कर भरी थी! आइये ऐसे ही युग पुरुष के बारे में जानते है कुछ दिलचस्प बातें.....
डॉ कलाम को मिसाइल मैन के नाम से भी जाना जाता है। कलाम को लोगों से मिलना बहुत अच्छा लगता था, यही कारण है कि जब भी कोई उनसे मिलना चाहता था वो इंकार नहीं करते थे। डॉ कलाम न सिर्फ एक अच्छे वैज्ञानिक थे, बल्कि उनमें इंसानियत भी कूट कूट कर भरी थी! आइये ऐसे ही युग पुरुष के बारे में जानते है कुछ दिलचस्प बातें.....
जब नन्हें कलाम को बेचना पड़ा अखबार....
कलाम मुस्लिम परिवार में जन्में थे। कलाम जब स्कूल जाते थे, तब उनके घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, ऐसे में कलाम को अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए बचपन से ही काम करना पड़ा। यही कारण है कि कलाम अपनी स्कूली शिक्षा के दौरान अखबार वितरित करते थे!
मेहनत, ललक और जोश से बदली अपनी लाइफ.....
कहा जाता है कि कलाम बचपन से ही मेहनती थे। स्कूल के दौरान से ही कलाम में कुछ नया सीखने की चाह थी! निरंतर सीखने की चाह ने ही कलाम को उस मुकाम पर खड़ा किया, जहाँ हर कोई पहुँचना चाहता है। अपनी मेहनत और प्रतिभा की वजह से ही डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने वैज्ञानिक के रूप में चार दशक तक DRDO (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) और ISRO को भी संभाला था।
कलाम 'जनता के राष्ट्रपति'.....
2002 में डॉ अब्दुल कलाम को राष्ट्रपति का पद सौंपा गया। राष्ट्रपति का पद संभालते ही कलाम ने अपनी पूरी जमापूंजी दान कर दी। क्योंकि उनका कहना था कि राष्ट्रपति का पद संभालते ही मैं जब तक जिंदा रहूंगा, तब तक भारत सरकार की जिम्मेदारी हूं, ऐसे में मुझे जमापूंजी की क्या जरूरत? कलाम सिर्फ राष्ट्रपति ही नहीं थे, बल्कि उनकी लोकप्रियता इतनी थी कि उन्हें जनता के राष्ट्रपति के नाम से सम्बोधित किया जाता है। राष्ट्रपति का जब उनका कार्यकाल खत्म हुआ तो वो फिर से शिक्षण की दुनिया मे वापस लौट आये। कलाम हमेशा एक शिक्षक रूप में ही रहना चाहते थे।
इस्तीफा लेकर घूमते थे कलाम.....
डॉ कलाम को कभी भी अपने पद से मोह नहीं हुआ, यही कारण है कि वो अपने साथ हमेशा इस्तीफा पत्र लेकर घूमते थे। कलाम ऐसे राष्ट्रपति थे, जो राष्ट्रपति भवन से जब वापस आये तो उनके हाथ मे सिर्फ दो सूटकेस था।
कलाम के नाम है अनेकों पुरस्कार......
1981- पद्म भूषण
1990- पद्म विभूषण
1997- भारत रत्न, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय एकता
1998- वीर सावरकर पुरस्कार
इन पुरस्कारों के अलावा भी कलाम के नाम दर्ज है अनेकों सम्मान। कलाम भारत के तीसरे ऐसे राष्ट्रपति थे, जिन्हें राष्ट्रपति बनने से पहले ही भारत रत्न से नवाजा जा चुका था। 27 जुलाई,2015 को डॉ कलाम इस दुनिया को छोड़ गए। जाते जाते भी कलाम इस दुनिया के लिए एक सवाल छोड़ गए, सवाल ये था कि इस दुनिया को इस धरती को कैसे जीने लायक बनाया जाए?


नाव में बैठकर फिजिक्स की किताब पढ़ने वाला एक साधारण सा बालक जब एक महान वैज्ञानिक एक महान लेखक और भारत के 11वे राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है तब हम सब का सर गर्व से ऊंचा हो जाता है ऐसे महापुरुष सदियों में एक ही बार पैदा होते हैं उनके कहीं गयी तथा लिखी गयी कुछ पंक्तियां आप भी ज़हन में जिंदा है ऐसे महान शख्सियत एपीजे अब्दुल कलाम को कोटि कोटि नमन ......
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"सबसे उत्तम कार्य क्या होता है? किसी इंसान के दिल को खुश करना, किसी भूखे को खाना देना, जरूरतमंद की मदद करना, किसी दुखियारे का दुख हल्का करना और किसी घायल की सेवा करना..."
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-अब्दुल कलाम
अब्दुल कलाम एक अतुलनीय पुरुष थे
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