शुक्रवार, 13 अक्टूबर 2017

जश्न-ए-दिवाली: साहेब हमारा क्या कसूर, जो सुनी कर दी दिवाली हमारी?

दिवाली को लेकर पूरे देश मे जश्न का माहौल हो गया है, लेकिन दिल्ली एनसीआर वालों के लिए ये दिवाली साइलेंट दिवाली हो सकती है! हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए इस साल दिल्ली एनसीआर में पटाखों पर बैन लगा दिया है!

 चलो ठीक है मान लिया जाए कि सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला सही है! लेकिन सवाल उसके फैसले पर नहीं उठ रहे है बल्कि जिस समय ये फैसला लिया गया, वो वाकई कई लोगों के रोजी रोटी पर गहरा असर पड़ेगा! इतना ही नहीं करीब 200 करोड़ रुपये का भारी भरकम नुकसान भी हो सकता है!
 
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद से पटाखा कारोबारियों का बहुत बड़ा नुकसान हुआ है! दिवाली के सीजन में पटाखों की बिक्री को देखते हुए कई ऐसे लोग भी होते हैं, जो दूर-दराज के क्षेत्रों से आकर दिल्ली में पटाखा बेचते है ताकि वो अपने बच्चों को दिवाली पर खुश कर सके! लेकिन अब क्या उनके बच्चों की दिवाली कैसे मनेगी? इन सवालों के बीच मे कई बड़े सवाल निकलते है, जिनमे से कुछ ऐसे है....

बड़े सवाल....
1.दिवाली के दस दिन पहले पटाखों पर बैन क्यों, अगर करना ही था तो एक महीने पहले होना चाहिए ताकि कोई भी विक्रेता पटाखा खरीदता ही नहीं!
2. अगर बैन लगाना ही था तो 1 नवम्बर तक ही क्यों, हमेशा के लिए क्यों नहीं?
3.प्रदूषण करने वाली हर चीज पर बैन कब? क्या अकेला पटाखों से ही प्रदूषण होता है? पान-गुटका-तम्बाकू-शराब आदि पर बैन कब? 
4.बैन करना ही था तो पूरे देश में क्यों नहीं? 
5. दिवाली से ठीक पहले पटाखों पर बैन लगाने से होने वाले नुकसान का भरपाई कौन करेगा? 
6.पटाखों से प्रदूषण होता है, इससे न तो कोर्ट अजनबी था और ना ही सरकार तो फिर क्यों सितंबर में लगने वाले बैन को हटा कर अब लगाया गया? 

आंकड़ों की बात करे तो दिल्ली-एनसीआर के पटाखा विक्रेताओं के पास लगभग 200 करोड़ का पटाखा फंस गया है। साथ ही आपको ये भी बता दूं कि नवभारत टाइम्स के वेबसाइट के अनुसार, दिल्ली में ही 50 से अधिक थोक और 300 से अधिक फुटकर पटाखा विक्रेता है। इसी तरह एनसीआर के शहरों में करीब 200 फुटकर पटाखा विक्रेता हैं।

इन्हीं तमाम सवालों से जूझ रहा है आज पटाखा बाजार। कई पटाखा विक्रेता तो ऐसे होते है, जो सिर्फ सीजनल मार्केटिंग करते है, ऐसे में ये उनके लिए किसी झटके से कम नहीं है! पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने शर्तों के साथ पटाखों पर बैन लगाने की बात को खारिज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद, पटाखा कारोबारियों ने याचिका दायर की थी लेकिन 13 अक्टूबर,2017 को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज करते हुए कहा कि फैसले में किसी भी प्रकार का कोई संसोधन नहीं किया जाएगा! गौरतलब है कि दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर 1 नवम्बर तक बैन बरकरार रहेगा!
दिवाली के अगले दिन दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण का ग्राफ बहुत ही ज्यादा बढ़ जाता है, ऐसे में अगर पिछले साल की दिवाली की बात करे तो कई दिनों तक दिल्ली धुंधली -धुंधली ही थी, जिसकी वजह से दिल्ली निवासियों का सांस लेना भी मुश्किल हो गया था! यही कारण है कि सुप्रीम कोर्ट ने नागरिकों की सुरक्षा को मद्देनजर रखते हुए ये फैसला किया है! खैर, सुप्रीम कोर्ट का फैसला वाकई काबिले तारीफ है! लेकिन पटाखों पर बैन लगा है, तो जल्दी ही सुप्रीम कोर्ट को सरकारी दफ्तरों और गैर-सरकारी दफ्तरों में लगे वातानुकूलित को भी बैन करने पर विचार करना चाहिए क्योंकि वातानुकूलित से निकलने वाली गैस ओजोन को नुकसान पहुँचाती है!
खैर, मांजरा चाहे जो कुछ भी क्यों न हो, लेकिन सुप्रीम कोर्ट को मजदूरों से उनकी रोजी रोटी नहीं छीननी चाहिए थी, बैन सही है, लेकिन बैन करने का समय बिल्कुल ही गलत है! आज दिल्ली एनसीआर के पटाखा विक्रेताओं का सवाल सुप्रीम कोर्ट से यही है कि आखिर क्या कसूर है उनका, जो उनकी दिवाली सुनी कर दी गयी? 

2 टिप्‍पणियां:

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  2. रुकिये ... न तो फोड़ने पर बैन है, न खरीदने पर, न बनाने पर, सिर्फ बेचने पर बैन है। और यह बैन किसके खिलाफ है ? हिंदुओं के या प्रदूषण के ?

    जो दिल्ली में रहता है या रह चुका है, वही जानता है कि "सांस लेना" कितना मुश्किल हो जाता है इस समय वहां. सामान्य स्वास्थ्य के आदमी का भी दम घुटने लगता है और हर दिल्लीवासी वाकिफ है। केवल और केवल जागरूकता अभियान की जरूरत थी और है जो इस समस्या से निजात दिला सकती है।

    लेकिन ठीक दीवाली के पहले कोर्ट से निर्णय ले आना, वह भी ऐसा जिसका लाभ नगण्य होगा, क्योंकि सिर्फ "बेचना" प्रतिबंधित है ! कोर्ट को बेमन का नाक नहीं घुसाना चैये था. अगर घुसाना ही था तो "सार्थक असरकारक" निर्णय देना था !

    असली खेल को समझिये... कोर्ट नाक नहीं घुसाती तो.... पटाखा बैन, दीवाली... हिन्दू त्योहार... ध्रुवीकरण...गुजरात चुनाव.... समीकरण कैसे बनता.... ?

    -संजीव मिश्रा

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