सोमवार, 2 अक्टूबर 2017

शास्त्री जयंती स्पेशल: सादगी और सच्चाई से ओतप्रोत, ऐसे थे भारत के दूसरे पीएम!

लाल बहादुर शास्त्री एक ऐसे व्यक्तिव है, जिनकी पहचान उनके नाम से बिल्कुल उलट है। जी हां, शास्त्री जी अपने नाम से बिल्कुल अलग-थलग है। उनके नाम यानी 'लाल' से आशय ये होता है कि गुस्से से लाल हो जाना, हमेशा क्रोधित होना, लेकिन शास्त्री जी ठीक इसके उलटे थे! सादगी और सच्चाई की मिसाल इस शख्स का जन्म 2 अक्टूबर, 1904 को यूपी के मुगलसराय में हुआ। शास्त्री जी के बारे में ढेर सारे अनकहे किस्से मौजूद है, जो शास्त्री जी के सादगी का उदाहरण देते है।
 
 कहा जाता है कि शास्त्री जी समय के पाबंद थे यानी घड़ी के सुइयों के अनुसार ही चलते थे!

9 जून, 1964 को शास्त्री जी ने पीएम का पद संभाला था, दुर्भाग्यपूर्ण शास्त्री जी पीएम पद संभाले हुए ज्यादा साल नहीं हुए तभी उनकी रहस्यमय तरीके से मौत हो गयी, जिसकी गुत्थी आज भी नहीं सुलझ पाई है। शास्त्री जी पीएम बनने से पहले रेल मंत्री, परिवहन एवं संचार मंत्री,वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री, गृह मंत्री तो थे। शास्त्री जी एक ऐसे रेलमंत्री थे, जिन्होंने एक ही रेल हादसा होने पर बिना किसी दबाव के तत्कालीन पीएम  जवाहर लाल नेहरू को अपना इस्तीफा को दे दिया था, जिसे नेहरू ने स्वीकार कर लिया था! हालांकि नेहरू जी ने कहा था कि मैंने शास्त्री जी का इस्तीफा इसलिए नहीं स्वीकार किया कि हादसे के लिए वो जिम्मेदार थे, बल्कि इसलिए स्वीकार किया क्योंकि शास्त्री जी  ईमानदारी  के लिए हमेशा मिसाल बने।
जय जवान, जय किसान - शास्त्री जी.....
शास्त्री जी के लिए आत्मसम्मान और आत्मनिर्भर दोनों ही बहुत महत्व रखता था! यही कारण है कि आजादी की लड़ाई के बाद जब भारत भुखमरी और गरीबी से जूझ रहा था तो शास्त्री ने देश के किसानों और जवानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए जय जवान, जय किसान का नारा दिया था! शास्त्री जी का ये नारा आज भी देश के किसानों और जवानों को आत्मनिर्भर बनने की शक्ति देता है।
सादगी और सच्चाई से ओतप्रोत थे शास्त्री जी....
इतिहास के पन्नो को अगर पल्टा जाए तो शास्त्री जी एक ऐसे पीएम थे, जिन्होंने कभी भी पीएम वाहन को अपने निजी काम में प्रयोग नहीं किया, इतना ही नहीं शास्त्री जी एक बार किसी शौरूम मे गए वहां उन्होंने साड़ी देखी, जो महंगी थी, जब शास्त्री जी ने साड़ी की कीमत पूछी तो शौरूम के मालिक ने कहा कि आप तो पीएम हो आपको तो भेंटस्वरूप में दी जाएगी ये साड़ी, इतना सुनते ही शास्त्री जी ने दो टूक में कहा कि मैं आने हैसियत के अनुसार ही साड़ी लूंगा, कोई उपहार नहीं लूंगा। शास्त्री जी की सच्चाई और ईमानदारी के तो वैसे बहुत किस्से है, लेकिन आप उनकी ईमानदारी को कभी नहीं भूल पाएंगे क्योंकि शास्त्री जी ने अपने बेटे का गलत ढंग से हो रहे प्रोमोशन को ही रद्द करा दिया था। इन्हीं सब बातों की वजह से शास्त्री जी के मरणोपरांत उन्हें भारत रत्न से समान्नित किया गया।
गांधी जी को अपना गुरु मानते थे शास्त्री जी.....
आजादी की लड़ाई में शास्त्री जी गांधी से बहुत प्रभावित थे, यही कारण था कि शास्त्री जी ने गांधी के अहसयोग आंदोलन में शामिल होने के लिए अपनी पढ़ाई को छोड़ दिया था, और गांधी जी के विचारों को अपनाने लगे। बताया जाता है कि शास्त्री जी गांधी जी को अपना गुरु मानते थे। गुरु के नक्शे कदम पर चलते हुए शास्त्री जी ने कहा था कि  “मेहनत प्रार्थना करने के समान है।” 
शास्त्री जी, देश के पीएम ही नहीं बल्कि देश के अनमोल रत्न है! शास्त्री जी आपके जोश व जज्बा को ये देश हमेशा से ही सलाम करता हुआ आया है, और आगे भी करता रहेगा!
                   "जय जवान, जय किसान"

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