जरा सोचिये, वो कैसे नजारा होगा जब परमाणु अविष्कारक ने अहिंसा के पुजारी को पत्र लिखा था, ये तो वही बात हो गयी कि धरती और आसमान का एक हो जाना! अरे हैरान मत होइए, आप में से अधिकांश लोग तो शायद समझ ही गये होंगे कि मैं किसकी बात कर रही हूं? चलिये फिर भी आपको बताती हूँ!
जाने-माने वैज्ञानिक अलबर्ट आइंसटीन और महात्मा गांधी वैसे तो कभी एक दूसरे से मिले नहीं थे लेकिन दोनों के बीच पत्रों का आदान-प्रदान जरूर हुआ था! आसमान और धरती का मिलना जैसे असंभव है ठीक वैसे ही परमाणु के आविष्कारक और अहिंसा के पुजारी के बीच पत्राचार होना, थोड़ा तो खटक ही रहा है!
1931 में अलबर्ट आइंसटीन ने गांधी जी के लिए पत्र लिखा! इस पत्र में आइंसटीन ने लिखा था कि "अपने कारनामों से आपने बता दिया है कि हम अपने आदर्शों को हिंसा का सहारा लिए बिना भी हासिल कर सकते हैं! साथ ही हम हिंसावाद के समर्थकों को भी अहिंसक उपायों से जीत सकते हैं।
पत्र में आगे आइंसटीन ने लिखा था कि आपकी मिसाल से मानव समाज को प्रेरणा मिलेगी और अंतरराष्ट्रीय सहकार और सहायता से हिंसा पर आधारित झगड़ों का अंत करने और विश्वशांति को बनाए रखने में सहायता मिलेगी। भक्ति और आदर के इस उल्लेख के साथ मैं आशा करता हूं कि मैं एक दिन आपसे आमने-सामने मिल सकूंगा!"
आइंसटीन के इस पत्र का जवाब महात्मा गांधी ने 1931 में दिया, जिसके बाद से आइंसटीन और गांधी जी के बीच पत्रों का आदान प्रदान होता रहा! गांधी जी ने आइंसटीन के पत्र का जवाब देते हुए लिखा था कि प्रिय मित्र, इससे मुझे बहुत संतोष मिलता है कि मैं जो कार्य कर रहा हूं, उसका आप समर्थन करते हैं।" आइंसटीन के मुलाकात करने वाली बात पर भी गांधी जी ने जवाब देते हुए लिखा था कि "सचमुच मेरी भी बड़ी इच्छा है कि हम दोनों की मुलाकात होती और वह भी भारत-स्थित मेरे आश्रम में।"
गांधी जी का जवाब मिलने के बाद आइंसटीन ने पूरी दुनिया से एक अपील की, तो पूरी दुनिया मे अफरा-तफरी मच गयी थी! अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर आइंसटीन ने ऐसी कौन सी अपील की थी? दरअसल, आइंसटीन ने दुनिया के सैनिकों से अपील की थी कि वे युद्ध में शामिल होने से इंकार कर दें! है ना, हैरान कर देने वाली बात? इतना ही नहीं दुनिया के मशहूर वैज्ञानिक आइंसटीन ने गांधी जी की तस्वीर अपने रूम में बतौर आइडल लगाई थी! माना जाता है कि आइंसटीन का ह्रदय परिवर्तन गांधी जी के असहयोग, सत्याग्रह आंदोलन से हुआ, जिसकी चर्चा यूरोप के मीडिया में जोरों से की जा रही थी। इसके बाद से ही गांधी और आइंसटीन के विचारों पर सार्वजनिक चर्चा होने लगी थी।
इन सारी बातों के बीच मैं आपको ये तो बताना भूल ही गयी कि आइंसटीन गांधी जी से सिर्फ दस साल के छोटे थे! गांधी जी की हत्या पर खेद व्यक्त करते हुए आइंसटीन ने एक संदेश में लिखा था कि वे सभी लोग जो मानव जाति के बेहतर भविष्य के लिए चिंतित हैं, वे गांधी की दुखद मृत्यु से जरूर ही विचलित हुए होंगे! साथ ही गांधी जी के अहिंसा की चर्चा करते हुए आइंसटीन ने ये भी कहा था कि अपने ही सिद्धांत यानी अहिंसा के सिद्धांत का शिकार होकर गांधी की मृत्यु हुई!
गांधीवादी विचारधारा का ही प्रभाव था या यूं कहें कि गांधी जी के विचारों में इतनी शक्ति थी कि उन्होंने परमाणु के जनक आइंसटीन के ह्रदय में अहिंसा का बीज बो डाला!

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