गुरुवार, 12 अक्टूबर 2017

ये कैसा इंसाफ, न कातिल का पता न ही गुत्थी सुलझी?

आखिर क्या कसूर था आरुषि का, जिसकी वजह से उसे मौत के घाट उतारा गया था? कौन है आरुषि का कातिल? क्या कभी आरुषि के असली कातिल को कानून पकड़ पायेगा भी या नहीं? इन्हीं तमाम सवालों से आज भी जूझ रही होगी आरुषि की आत्मा!

 जी हाँ, 9 साल पहले, दिल्ली से सटे नोएडा में आरुषि का उसी के घर में बेदर्दी से हत्या कर दी गई थी! इस हत्याकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था!
ये हत्या सिर्फ हत्या तक नहीं सीमित रही बल्कि किसी सीरियल की स्टोरी की तरह एक के बाद एक नया मोड़ आता जा रहा है, लेकिन हत्या की गुत्थी सुलझने का नाम ही नहीं ले रही है!
ऐसा नहीं है कि मामले को हल्के में लिया गया हो! पुलिस से लेकर सीबीआई ने इस मामलें की जांच की थी! सीबीआई कोर्ट ने तो आरुषि के माता-पिता को दोषी मानकर 2013 में उम्रकैद की सजा सुना दी थी, लेकिन दम्पति ने हाईकोर्ट में सीबीआई के फैसले को चुनौती दिया! चार साल की सजा काटने के बाद हाइकोर्ट दम्पति को रिहा करने का आदेश दिया! साथ ही आपको ये भी बता दूं कि "कोर्ट ने दोनों को रिहा करते समय ये कहा कि जो गवाह और सबूत पेश हुए हैं, उससे ये साफ नहीं होता की आरुषि के माता-पिता ने ही उसका मर्डर किया है!"


कुछ यूं थी आरुषि की हत्या की कहानी.....
सुनी सुनाई बातों का क्या भरोसा साहेब! हमने भी वही सुनी जो हमे सुनाया गया, बाकी सच्चाई क्या है वो तो बस दो ही लोग जानते है, एक तो आरुषि और दूसरा उसका कातिल! आरुषि हत्या की कहानी कुछ यूं सुनाई जाती है कि मई, 2008 की रात को आरुषि अपने बेडरूम में थी, सुबह जब देखा तो आरुषि की हत्या हो चुकी थी! आरुषि की हत्या का आरोप पहले उसके नौकर हेमराज पर लगा, लेकिन यहाँ भी एक बड़ा संस्पेंस सुनने को मिला कि जिस नौकर पर आरोप लगाया गया, उसे भी मौत के घाट उतार दिया था! सुनने में तो ये भी आया था कि आरुषि और उसके नौकर के बीच मे सबंध थे, लेकिन सिर्फ इस वजह उसे मौत के घाट उतार देना बात कुछ हजम सी नहीं हो रही!
आरुषि की जब हत्या हुई तो घर मे उसके माता-पिता थे, सीबीआई ने जांच में उन्हें दोषी करार दिया था, लेकिन हाइकोर्ट ने उन्हें रिहा करने का आदेश दिया! कोर्ट के फैसलें को एक तरफ़ रख कर अगर मुद्दे की समीक्षा की जाए तो कई तरह के सवाल खड़े होते है, जिनमे से एक ये कि रात को कोई घर में आता है और आरुषि के माता-पिता को भनक तक नहीं लगती है, ऐसे कैसे?


सवाल सिर्फ फैसले पर ही नहीं खड़े होते है बल्कि जांच पर भी सवाल खड़े होते! दो बार सीबीआई ने टीम बनाई, लेकिन फिर भी सीबीआई सबूत नहीं जुटा पाई? सवाल तो ये भी खड़ा होता है कि क्या यूपी पुलिस और सीबीआई की लापरवाही की सजा भुगत रही थी आरुषि की फैमिली? लेकिन अगर सीबीआई कोर्ट का फैसला सही था तो क्या अब सीबीआई कोर्ट सुप्रीम कोर्ट में हाइकोर्ट के फैसले को चुनौती देगा? 
खैर, मांजरा चाहे जो कुछ भी क्यों नहीं हो, लेकिन हाइकोर्ट के फैसले के बाद तलवार परिवार ये कहता फिर रहा है कि हमें इंसाफ मिल गया! ये कैसा इंसाफ है साहेब? आपकी बेटी का कातिल घूम रहा है, और आप कह रहे है कि इंसाफ मिल गया? चलिये मान लेते है कि आपके लिए आपकी बेटी बुरी थी, लेकिन वो चाहे जैसी भी थी क्या आपको उसको इंसाफ दिलाने की जरा भी नहीं पड़ी है?
बहरहाल, अब मामलें में नये सिरे से जांच होगी, लेकिन सवाल वही खड़ा होता है कि जब सारे सबूत मिटा दिए गए है तो अब जांच में क्या मिलेगा? साथ ही सवाल ये भी खड़ा होता है कि क्या कभी वाकई आरुषि को इंसाफ मिल पायेगा या आरुषि की कहानी इतिहास के पन्नो में दब कर रह जायेगी?

1 टिप्पणी:

  1. संवेदना.....!आरुषि के माता-पिता के दिल मे बोझ रहेगा ज़िन्दगी भर की वो अपनी बेटी को इंसाफ नही दिला सके।

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