सोमवार, 2 अक्टूबर 2017

गांधी जयंती स्पेशल: वो था बापू लाठी वाला....

 गांधी सिर्फ नाम ही नहीं है बल्कि शक्ति है! गांधी जी के शक्तियों का ही प्रभाव है कि आज भी पूरी दुनिया में उनका नाम बड़े ही सम्मान से लिया जाता है। जहाँ एक तरफ भारत में गांधी जी के जन्मदिन को गांधी जयंती के रूप में मनाया जाता है तो वहीं दूसरी तरफ सयुंक्त राष्ट्र संघ में 2007 से गांधी जयंती को 'विश्व अहिंसा दिवस' के रूप में मनाया जाता है।

 गांधी जी के बारे में हम सभी सालों से पढ़ते या सुनते आ रहे हैं, लेकिन गांधी जी के बारे में जितना पढ़ो या सुनो उतना ही कम लगता है।
गांधी जी के बारे में तो आप सभी जानते ही हैं फिर भी आपको बताती हूँ कि 2 अक्टूबर,1869 में गुजरात के पोरबन्दर में गांधी जी का जन्म हुआ। 13 साल की अल्पआयु में उनका विवाह कस्तूरबा से हो गया। गांधी जी को प्यार से बापू के नाम से जाना जाता है। 

 1891 में इंग्लैंड से जब गांधी जी भारत आये थे, तब उन्हें उनकी माता जी के देहांत की खबर मिली, उन्हें काफी दुःख हुआ था! जिसके बाद गांधी जी अफ्रीका चले गए वहां उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ मुहिम छेड़ दी थी। 1915 में गांधी जी जब अफ्रीका से भारत आये थे तो देश में अंग्रेजो का शासन था, भारत अंग्रेजो का गुलाम था, लेकिन गांधी जी ने अपने विचारों से अंग्रेजों को देश छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया! गांधी जी के व्यक्तित्व में कुछ नहीं बहुत कुछ होगा, तभी तो गांधी के विचारों से मतभेद रखने वाले सुभाष चन्द्र बोस ने उन्हें पहली बार राष्ट्रपिता के नाम से पुकारा था, जिसके बाद से ही गांधी को लोग राष्ट्रपिता के नाम से जानने लगे!

 ऐसा नहीं है कि गांधी जी के विरोधी नहीं है, हमारे ही देश मे अधिकांश लोग गांधी जी का विरोध करते है। लोगो का कहना होता है कि आजादी की लड़ाई में गांधी जी का कोई खास योगदान नहीं था! इतना ही नहीं गांधी के आलोचक ये भी कहते है कि गांधी जी ने किया क्या? आजादी सिर्फ चरखा से ही नहीं मिली, ये बात तो ठीक है कि आजादी की लड़ाई में सिर्फ गांधी जी का योगदान नहीं था बल्कि समस्त हिंदुस्तानियों का था! लेकिन इस बात से नकारा नहीं जा सकता है कि गांधी के मजबूत इरादों ने अंग्रेजो को पस्त कर दिया था! असहयोग आंदोलन, भारत छोड़ो, ये गांधी जी के नेतृत्व में ऐसे आंदोलन हैं, जिसने अंग्रेजों की बखिया उधेड़ कर रख दी थी! गांधी जी की लोकप्रियता का अंदाजा तो इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके एक आवाज पर, पूरा देश उनके पीछे चल पड़ता था! इतना ही नहीं गांधी जी के एक आवाज पर लोग नौकरी-पढ़ाई सब छोड़ कर उनके साथ चल पड़ते थे!

 सत्य अहिंसा के पुजारी गांधी जी ने देश को न सिर्फ अहिंसा के मार्ग पर चलने का संदेश दिया बल्कि वो देश में रामराज्य की स्थापना करना चाहते थे, लेकिन उनका ये सपना पूरा होता कि इससे पहले ही उन्हें गोलियों से छलनी कर दिया! गांधी जी के प्रमुख विचारों में से एक ये था कि "अगर कोई एक गाल पर थप्पड़ मारे, तो दूसरा गाल आगे कर दो।" दरअसल, आज के युग मे गांधी जी के इस विचार का बड़ा मजाक उड़ाया जाता है, लोगों का मानना है कि गांधी कमजोर थे, लड़ नहीं सकते थे, इसलिए दूसरा गाल आगे करने का संदेश देते थे! असल में, गांधी जी के इस विचार का आशय ये है कि इतने सहनशील बन जाओ कि सामने वाला आपकी सहनशीलता से हार मान ले!

 दरअसल, गांधीगिरी का यही तो सार है कि खुद मत हराओ किसी को, बल्कि इतने मजबूत बनो कि सामने वाला आपकी मजबूती को देखकर स्वयं ही हार मान ले! गांधी अमर हैं, जिनका कभी भी अंत नहीं हो सकता हैं! गांधी के विचारों को पढ़कर आज भी हमे एक अद्भुत सी ऊर्जा मिलती है , लेकिन अफसोस इस बात का है कि आज हम सिर्फ गांधी के विचारों को पढ़ते ही हैं, अपने जीवन मे लागू नही करते है। जिसने अंग्रेजो को अपनी सादगी और अहिंसा के सामने झुकने के लिए मजबूर कर दिया था वो कोई और नहीं बल्कि
 "सत्य अहिंसा का पुजारी, वो था बापू लाठी वाला"

1 टिप्पणी:

  1. बहुत बेहतरीन लेख. निष्कर्ष बहुत ही सुव्यवस्थित, प्रभावशाली और सुंदर है.

    जवाब देंहटाएं