रविवार, 24 सितंबर 2017

बीएचयूकांड: छेड़खानी, लाठी बरसाना ही तुम्हारी मर्दानगी है!

गजब का समाज है मेरा...नवरात्रि का जश्न मना रहे है, दुर्गा माँ को पूज रहे हैं, लेकिन देश की बहू-बेटियों की इज्जत सरेआम उछाल रहे है! वाह क्या समाज बनाया है हमने! अरे समाज के ठेकेदारों कहाँ छिपे बैठे हो, क्यों नहीं आते हो सामने अब? अच्छा हां, भूल गयी मैं! आप तो यही कहेंगे न कि क्या जरूरत थी उस लड़की को शाम को कैंपस में घूमने की या फिर और भी बहाने होंगे न आपके पास? गजब का रूल है आपका, अपने हिसाब से बना भी लेते हो और तोड़ भी देते हो!

 गली-मोहल्लों में तो बहु बेटियों के साथ छेड़खानी तो होती आयी है, लेकिन अब तो हद ही हो गयी कॉलेज कैंपस में छेड़खानी?
सरेआम मनचले उस बेटी को परेशान कर रहे थे, उसके कुर्ते में हाथ डाल रहे थे, लेकिन कॉलेज प्रशासन ने एक भी कार्रवाई नहीं किया,क्यों? पीएम जी, ऐसे ही पढ़ाएंगे आप बेटियों को? ऐसे ही आपका बेटी बचाओ,बेटी पढ़ाओ मिशन साकार हो जाएगा? अरे हां, यूपी के सीएम योगी जी, बहु बेटियों की सुरक्षा के लिए पहले दिन से ही काम कर रहे हैं आप, लेकिन माफ कीजियेगा साहेब आपका काम नजर नहीं आ रहा है! योगी जी जब आप सत्ता में आये थे प्रदेश की बेटियां खुश हुई थी, आपको पता है क्यों, क्योंकि उनको विश्वास था, आप कुछ करो या न करो लेकिन उनकी सुरक्षा के लिए कड़े कानून बनाओगे! लेकिन हुआ बिल्कुल उल्टा!

 देश के सबसे बड़े राज्य यूपी में बेटियों के साथ हुई ये घटना, सबको झकझोर के रख देती है। मामला इतना नहीं बढ़ता, लेकिन लड़कियां है हम, कहाँ तक और कितना बर्दाश्त करें? कॉलेज कैंपस में कॉलेज प्रशासन हमारी सुरक्षा नहीं कर पाता है? सुरक्षा तो अब सपनों की बात लगती है, यहां एक्शन भी नहीं लिया गया। अरे हां, एक्शन लिया गया न, बेटियों पर लाठी बरसा कर, ये भी अच्छा है, आपके लिए तो ये भी मर्दानगी की ही बात होगी! आपके सिस्टम का शायद यही काम करने का तरीका होगा कि अपराध हमारे साथ और आपका कानून जुल्म भी हमारे ही साथ करें!
 डिअर सिस्टम, देश की बेटियों पर जुल्म करना बंद करो, बेटियां अब आपके जुल्म से डरने वाली नहीं है! लेकिन हां अगर आप सोच रहे होंगे कि आपने लाठी बरसा कर मर्दानगी का काम किया है तो माफ कीजिये, आप अपनी नाकामी को दर्शा रहे है! बीएचयू की ये बेटियां अकेली नहीं है, इनके साथ पूरा देश खड़ा है! 
 "आज हौसलें हैं बुलन्द मेरे, तू कर लें चाहे लाख अत्याचार!
 न्याय तो मैं लेकर रहूंगी क्योंकि हौसलें है बुलंद मेरे!"

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