अगर आप टीचर का मतलब सिर्फ स्कूल, कॉलेज या सिर्फ पाठ्यक्रम को खत्म कराने वाले को ही समझते है, तो माफ कीजिये आप गलत है! क्योंकि टीचर सिर्फ वो नहीं जो आपको किताबी ज्ञान दे, बल्कि टीचर तो वो होते है, जो आपको किताबी ज्ञान देने के साथ ही आपको सही दिशा दिखाए! इस कड़ी में वो टीचर आपका भाई, माता-पिता, दोस्त या फिर कोई भी हो सकता है! तो आइयें इस टीचर डे अपने लाइफ के असली टीचर को याद करें, जिसने वाकई आपकी लाइफ में रोशनी का काम किया हो!
क्यों मनाया जाता है टीचर डे....
टीचर डे क्यों मनाया जाता है, इससे आप सभी अच्छे से रूबरू होंगे, फिर भी आपको बताती हूँ!
आजाद भारत के पहले उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की याद में शिक्षक दिवस मनाया जाता है। राधाकृष्णन जी का जन्म 5 सितंबर 1888 में हुआ था। मान्यता है कि राधाकृष्णन को उनके स्टूडेंट्स द्वारा उनका जन्मदिन मनाना अच्छा नहीं लगता था, इसलिए उन्होंने अपने स्टूडेंट्स से कहा कि अगर आप मेरे जन्मदिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाए तो मुझे बहुत अच्छा लगेगा, तभी से शिक्षक दिवस मनाया जाने लगा!
आमतौर पर हम लोग टीचर को स्कूल, कॉलेज और ट्यूशन टीचर के रूप में ही समझते है, लेकिन अब वक्त आ गया है, जब आपको इस समझ से बाहर निकलने की जरूरत है। मेरे कहने का बस इतना ही आशय है कि टीचर वो जो आपको कदम-कदम पर सही राह दिखाए! आज मैं अपनी लाइफ के टीचर्स के बारे में बताऊंगी, जिन्होंने मुझे कदम-कदम पर सही राह दिखाया है! इसके लिए मैं अपनी लाइफ के असली टीचर से आपका परिचय कराऊँगी....
बचपन से फ्यूचर टीचर्स.....
इस कड़ी में मेरे पेरेंट्स शामिल है, जिसमें मेरी मम्मा, डैडी और मेरे भाई! इन्होंने हमेशा मुझे सही राह दिखाया। एक बेहतरीन गाइड के तौर पर मेरा भाई, जिन्होंने हमेशा से मुझे गाइड किया है, कहीं अगर गलती भी हुई तो मुझसे उन्होंने मुझे समझाया! कहने का आशय यह है कि हर मोड़ पर मेरा साथ दिया है और आगे भी देंगे!
स्कूल टीचर्स.....
स्कूल टीचर में सबसे पहले नाम आता है, मेरे स्कूल प्रबंधक पवन त्यागी का, इन्होंने भी स्कूल लाइफ में हमेशा मुझे गाइड किया। इसके अलावा इंग्लिश,हिंदी और पीसीएम की टीचर्स ने भी मेरा हमेशा मार्गदर्शन किया।
कॉलेज टीचर्स....
कॉलेज के पहले ही दिन एक टीचर से मुलाकात हुई, कुछ अलग अंदाज,अपनी बात को बड़े ही बेबाकी से कह देने वाली छवि रखने वाले डॉ.हरनेक सिंह गिल, जिन्होंने हमेशा सार्थक ज्ञान की बात किया, इनसे भी बहुत कुछ सीखा मैंने! इसके अलावा डॉ.प्रवीण झा और डॉ अमृत कुमार ने भी हमेशा मुझे मोटिवेट किया, ये ऐसे टीचर्स है, जिन्होंने किताबी ज्ञान के अलावा लाइफ में कैसे आगे बढ़े, इसका भी भरपूर ज्ञान दिया!
ट्रेनर टीचर्स.....
अपनी स्टडी के दौरान मैंने कई मीडिया घराने में ट्रेनिंग ली। ट्रेनिंग के दौरान हर संस्था से मुझे एक बेहतरीन टीचर मिले! ट्रेनिंग के दौरान मुझे दैनिक जागरण में मनु त्यागी, जनसत्ता में संजय सर, टोटल में संध्या और सोनिका मैम इसके अलावा सहारा न्यूज़ चैनल में वरिष्ठ पत्रकार प्रतिभा राय और नीरद जी जैसे टीचर्स मिले, जिन्होंने मुझे प्रोफेशनल लाइफ से रूबरू कराया है।
आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद!
(नोट: मेरे लाइफ के तो ये सभी है असली टीचर, आप भी शेयर कीजिये अपनी लाइफ के असली टीचर के बारे में।)
क्यों मनाया जाता है टीचर डे....
टीचर डे क्यों मनाया जाता है, इससे आप सभी अच्छे से रूबरू होंगे, फिर भी आपको बताती हूँ!
आजाद भारत के पहले उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की याद में शिक्षक दिवस मनाया जाता है। राधाकृष्णन जी का जन्म 5 सितंबर 1888 में हुआ था। मान्यता है कि राधाकृष्णन को उनके स्टूडेंट्स द्वारा उनका जन्मदिन मनाना अच्छा नहीं लगता था, इसलिए उन्होंने अपने स्टूडेंट्स से कहा कि अगर आप मेरे जन्मदिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाए तो मुझे बहुत अच्छा लगेगा, तभी से शिक्षक दिवस मनाया जाने लगा!
आमतौर पर हम लोग टीचर को स्कूल, कॉलेज और ट्यूशन टीचर के रूप में ही समझते है, लेकिन अब वक्त आ गया है, जब आपको इस समझ से बाहर निकलने की जरूरत है। मेरे कहने का बस इतना ही आशय है कि टीचर वो जो आपको कदम-कदम पर सही राह दिखाए! आज मैं अपनी लाइफ के टीचर्स के बारे में बताऊंगी, जिन्होंने मुझे कदम-कदम पर सही राह दिखाया है! इसके लिए मैं अपनी लाइफ के असली टीचर से आपका परिचय कराऊँगी....
बचपन से फ्यूचर टीचर्स.....
इस कड़ी में मेरे पेरेंट्स शामिल है, जिसमें मेरी मम्मा, डैडी और मेरे भाई! इन्होंने हमेशा मुझे सही राह दिखाया। एक बेहतरीन गाइड के तौर पर मेरा भाई, जिन्होंने हमेशा से मुझे गाइड किया है, कहीं अगर गलती भी हुई तो मुझसे उन्होंने मुझे समझाया! कहने का आशय यह है कि हर मोड़ पर मेरा साथ दिया है और आगे भी देंगे!
स्कूल टीचर्स.....
स्कूल टीचर में सबसे पहले नाम आता है, मेरे स्कूल प्रबंधक पवन त्यागी का, इन्होंने भी स्कूल लाइफ में हमेशा मुझे गाइड किया। इसके अलावा इंग्लिश,हिंदी और पीसीएम की टीचर्स ने भी मेरा हमेशा मार्गदर्शन किया।
कॉलेज टीचर्स....
कॉलेज के पहले ही दिन एक टीचर से मुलाकात हुई, कुछ अलग अंदाज,अपनी बात को बड़े ही बेबाकी से कह देने वाली छवि रखने वाले डॉ.हरनेक सिंह गिल, जिन्होंने हमेशा सार्थक ज्ञान की बात किया, इनसे भी बहुत कुछ सीखा मैंने! इसके अलावा डॉ.प्रवीण झा और डॉ अमृत कुमार ने भी हमेशा मुझे मोटिवेट किया, ये ऐसे टीचर्स है, जिन्होंने किताबी ज्ञान के अलावा लाइफ में कैसे आगे बढ़े, इसका भी भरपूर ज्ञान दिया!
ट्रेनर टीचर्स.....
अपनी स्टडी के दौरान मैंने कई मीडिया घराने में ट्रेनिंग ली। ट्रेनिंग के दौरान हर संस्था से मुझे एक बेहतरीन टीचर मिले! ट्रेनिंग के दौरान मुझे दैनिक जागरण में मनु त्यागी, जनसत्ता में संजय सर, टोटल में संध्या और सोनिका मैम इसके अलावा सहारा न्यूज़ चैनल में वरिष्ठ पत्रकार प्रतिभा राय और नीरद जी जैसे टीचर्स मिले, जिन्होंने मुझे प्रोफेशनल लाइफ से रूबरू कराया है।
आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद!
(नोट: मेरे लाइफ के तो ये सभी है असली टीचर, आप भी शेयर कीजिये अपनी लाइफ के असली टीचर के बारे में।)

छात्र पढ़ते है चले जाते है, किसी को उनके टीचर इतना याद नही रह पाते, मैं ये नही कह रहा हूँ कि वो स्वार्थी हैं, समझता हूँ उनकी भी प्राथमिकता होती है, कोई टीचर को अपनी प्राथमिकता क्यों नही बनाता? हमारी लेखिका को याद है यही उनके टीचर के लिए बड़ी खुशी, तोहफा है।
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