दशहरा यानी बुराई पर अच्छाई की जीत! इस त्यौहार को बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। जगह-जगह रावण का पुतला जलाया जाता है। चलो अच्छा है, बुराई पर चलने वालों का हाल भी यही ही होना चाहिए! रावण के कर्मों की सजा तो श्रीराम दे ही चुके हैं, और रही सही कसर हम लोग हर साल पूरा ही करते हैं। यहां एक बड़ा सवाल खड़ा होता है कि क्या वाकई रावण को जला देने से ही आज हम बुराइयों पर जीत हासिल कर पा रहे हैं? क्या वाकई दशहरा के दिन हम अपने अंदर के तमाम बुराइयों के नाश कर देते हैं? अगर ऐसा है तो फिर क्यों आज समाज में इतनी बुराइयों ने अपना डेरा जमा रखा है?
दशहरा पर हम रावण दहन इसलिये करते है क्योंकि हम खुद को याद दिलाते हैं कि बुराई का नाश होना तो तय ही है,









