शनिवार, 30 सितंबर 2017

दशहरा स्पेशल: रावण तो जला रहे हैं, पर बुराइयों का नाश कब?

दशहरा यानी बुराई पर अच्छाई की जीत! इस त्यौहार को बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। जगह-जगह रावण का पुतला जलाया जाता है। चलो अच्छा है, बुराई पर चलने वालों का हाल भी यही ही होना चाहिए! रावण के कर्मों की सजा तो श्रीराम दे ही चुके हैं, और रही सही कसर हम लोग हर साल पूरा ही करते हैं। यहां एक बड़ा सवाल खड़ा होता है कि क्या वाकई रावण को जला देने से ही आज हम बुराइयों पर जीत हासिल कर पा रहे हैं? क्या वाकई दशहरा के दिन हम अपने अंदर के तमाम बुराइयों के नाश कर देते हैं? अगर ऐसा है तो फिर क्यों आज समाज में इतनी बुराइयों ने अपना डेरा जमा रखा है? 
दशहरा पर हम रावण दहन इसलिये करते है क्योंकि हम खुद को याद दिलाते हैं कि बुराई का नाश होना तो तय ही है,

शुक्रवार, 29 सितंबर 2017

#युवा कलम-युवा आवाज: विकास की दुहाई, पर होए न 'विकास'

'विकास' एक बहुत ही पेंचीदा चीज़ है. ज़्यादा पढ़े-लिखे और डिग्रीधारी इसकी मनगढंत परिभाषा गढ़ते रहते हैं. और सत्ता से दूर व्यक्ति इसे मात्र छलावा मानते हैं. कुछ लोग इसे दृढ़ इच्छाशक्ति और संकल्प से उपजी मानवनिर्मित कृति भी कहते हैं, लेकिन ऐसा है नहीं. ये सब कोरी कल्पनायें मात्र हैं. दरअसल विकास एक निखालिस प्राकृतिक वस्तु है. एकदम परिस्थितियजन्य. कुकुरमुत्ते की भांति. और हमेशा कूड़े-करकट में ही पैदा होता है. 
इतिहास गवाह है कि जब जब देश में भूख और भीख जैसा घटियापन बढ़ा है; विकास उपजा है. उपजा क्या नाचा है. और ऐसा नाचा कि पल दो पल तो सारी क़ायनात विकासमय हो गई. चारों ओर विकास विकास हो लिया. सारी आवाज़े धूमिल हो गयीं. लोग बिलबिला गए.

गुरुवार, 28 सितंबर 2017

बर्थडे स्पेशल: 'पैरों में बन्धन' से 'नैनो में सपना' लिये संगीत की दुनिया की महारथी!

 संगीत की दुनिया की मल्लिका जिन्होंने अपनी आवाज से सबको दीवाना बना दिया! लाजवाब आवाज, भारत रत्न से पुरस्कृत एक ऐसी संगीतकार जिसकी आवाज पर थिरके बड़े से बड़े कलाकार! जी हाँ, मैं बात कर रही हूं संगीत की दुनिया की महारथी लता मंगेशकर की।
 लता जी का जन्म 28 सितंबर, 1929 को मध्यप्रदेश के इंदौर में हुआ! 13 साल की जब लता दी थी, तब इनके सर से पिता का हाथ उठा गया, लता जी ने संगीत की दुनिया में अपना नाम फेम बनाने के लिए बहुत ही संघर्ष किया, उनकी संघर्षो का ही नतीजा है कि आज उन्हें सुरों की मल्लिका के नाम से जाना जाता है।

बुधवार, 27 सितंबर 2017

जब महिलाएं ही स्वस्थ नहीं होंगी तो देश कैसे विकास करेगा?

 आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में बुनियादी मुद्दे किसी कोने में दबते जा रहे हैं, और हमारे देश की मीडिया नेताओं और कलाकारों के पीछे भगाती रहती है। मीडिया इस पर ज्यादा ध्यान देता है कि आज किस पार्टी के नेता ने किस पार्टी के नेता पर तंज कसा है या फिर आज कौन सा कलाकार किस कलाकार के साथ डेट पर गया या फिर किसका ब्रेकअप हुआ! इन सबके के बीच मे बुनियादी मुद्दे पीछे छूटते जा रहे हैं! बुनियादी मुद्दों से जुड़ा हुआ एक मामला ये भी है कि महिलाओं में कुपोषण का प्रभाव ज्यादा है। ऐसे में ढेर सारे सवाल खड़े होते हैं, जिनमें से एक ये है कि जब देश की महिलाएं ही स्वस्थ नहीं होंगी तो देश कैसे विकास करेगा ?


 देश के विकास में महिलाओं के योगदान से तो शायद ही कोई बेखबर होगा क्योंकि हम सभी जानते है कि देश का भविष्य बच्चे होते हैं,

मंगलवार, 26 सितंबर 2017

#युवा कलम-युवा आवाज: युवाओं के लिए राष्ट्रीय कर्तव्य सर्वोपरि होना चाहिए

युवाओं का शौर्य, पराक्रम एवं साहस ही राष्ट्र की एकता, अखंडता व सुरक्षा का सर्वोत्तम आधार है। युवाओं के शौर्य एवं तेज़ के बिना राष्ट्रीय एकता, अखंडता की कल्पना करना संभव नही है; क्योंकि राष्ट्रीय एकता की कल्पना तो की जा सकती है, परंतु इसे क्रियान्वित करने के लिए युवाओं की ही आवश्यकता पड़ती है। इसके लिए केवल वे ही युवा जिम्मेदार नहीं है, जो राष्ट्रीय सेवाओं में कार्यरत हैं, बल्कि वे भी हैं, जो देश के अलग अलग हिस्सों में अलग अलग कार्यों में संलग्न हैं। जो जहां है, वहीं उनकी अपनी विशेष भूमिका है। देश का प्रत्येक युवा अपने ढंग से अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए कार्य करे तो यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।



           युवा अपने काम को ईमानदारी से करते हुए जनसेवा, राष्ट्रीय सौहार्द, भ्रष्टाचार, अनाचार, अनीति से संघर्ष जैसे कितने ही महत्वपूर्ण कार्य संपन्न कर सकते है।

सोमवार, 25 सितंबर 2017

धर्म नहीं, देश के नजरिये से देखो रोहिंग्या समुदाय को!

 रोहिंग्या समुदाय की चर्चा आज पूरे विश्व में हो रही है, हर कोई इन्हें दूसरे देश पर थोपना चाहता है, लेकिन कोई इन्हें अपनाना नहीं चाहता है। मसला इतना गरम हो गया है कि ये मुद्दा वैश्विक स्तर की चुनौती का रूप लेता नजर आ रहा है। खैर, मैं बात करूँगी कि आखिर रोहिंग्या को शरण हम क्यों नहीं दे सकते है? रोहिंग्या समुदाय पर मैं ज्यादा पीछे नहीं जाऊंगी, मैं सिर्फ उन कारणों पर बात करूँगी, जिसकी वजह से भारत चाहकर भी इस समुदाय को जगह नहीं दे सकता है, और अगर दे भी दिया तो समुदाय के साथ गद्दारी होगी क्योंकि वो हमारे यहां इस उम्मीद से आएंगे कि उनका जीवन खुशहाली से बीते। 



 भारत की सुरक्षा एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार रोहिंग्या समुदाय से देश को खतरा है।

रविवार, 24 सितंबर 2017

बीएचयूकांड: छेड़खानी, लाठी बरसाना ही तुम्हारी मर्दानगी है!

गजब का समाज है मेरा...नवरात्रि का जश्न मना रहे है, दुर्गा माँ को पूज रहे हैं, लेकिन देश की बहू-बेटियों की इज्जत सरेआम उछाल रहे है! वाह क्या समाज बनाया है हमने! अरे समाज के ठेकेदारों कहाँ छिपे बैठे हो, क्यों नहीं आते हो सामने अब? अच्छा हां, भूल गयी मैं! आप तो यही कहेंगे न कि क्या जरूरत थी उस लड़की को शाम को कैंपस में घूमने की या फिर और भी बहाने होंगे न आपके पास? गजब का रूल है आपका, अपने हिसाब से बना भी लेते हो और तोड़ भी देते हो!

 गली-मोहल्लों में तो बहु बेटियों के साथ छेड़खानी तो होती आयी है, लेकिन अब तो हद ही हो गयी कॉलेज कैंपस में छेड़खानी?

#युवा कलम-युवा आवाज: बीएचयू की छात्राओं का प्रदर्शन, कब मिलेगी सुरक्षा?

यूं ही तो नहीं कोई किसी से भिड़ जाता है. यूं ही तो नहीं कोई कहीं बैठ जाता है. तो क्या कारण रहा होगा कि BHU की छात्राओं को प्रदर्शन के लिए विवश होना पड़ा ? क्या कारण रहा होगा कि एन्टी रोमियो स्क्वाड अपने लक्षित उद्देश्य में असफल रहा ? जबकि उसका प्रचार तो बड़ी धूम-धाम से किया गया था. वो सत्ता पक्ष के गलियारों का बैनर भी था. चुनावी घोषणा पत्र से लेकर उपलब्धियों के आत्म-प्रशंसन तक उसे शीर्षस्थ रखा गया और आज हालात ये हैं कि छात्राओं को प्रदर्शन करना पड़ रहा है । 
 
कल जब प्रधानमंत्री मोदी अपने संसदीय क्षेत्र बनारस के दौरे पर निकलते हैं तो पाते हैं कि

गुरुवार, 14 सितंबर 2017

हिन्दी दिवस स्पेशल!

 देश भर में हिन्दी दिवस बड़े ही धूमधाम से मनाया जा रहा है। कई मंच सजे है, हिन्दी के शुभचिंतक हिन्दी दिवस के पावन मौके पर लंबे चौड़े भाषण दे रहे है। इन सबके बीच एक बड़ा सवाल खड़ा होता है कि भाषण देने के बाद अधिकांश विशेषज्ञ हिंदी में बात भी करना पसंद नहीं करते है तो फिर क्यों वो हिन्दी दिवस पर भाषण देते है? खैर, भाषा कोई भी क्यों न हो, वो सम्मान के हकदार है! 


कुछ दिन पहले एक भाषा सिखाने वाले एक इंस्टीट्यूट के बाहर एक होडिंग देखा था मैंने उसमें बड़े ही आकर्षक भाव से ये लिखा था कि 'आइये इंग्लिश में बात करें'।

मंगलवार, 5 सितंबर 2017

टीचर डे स्पेशल.....

अगर आप टीचर का मतलब सिर्फ स्कूल, कॉलेज या सिर्फ पाठ्यक्रम को खत्म कराने वाले को ही समझते है, तो माफ कीजिये आप गलत है! क्योंकि टीचर सिर्फ वो नहीं जो आपको किताबी ज्ञान दे, बल्कि टीचर तो वो होते है, जो आपको किताबी ज्ञान देने के साथ ही आपको सही दिशा दिखाए! इस कड़ी में वो टीचर आपका भाई, माता-पिता, दोस्त या फिर कोई भी हो सकता है! तो आइयें इस टीचर डे अपने लाइफ के असली टीचर को याद करें, जिसने वाकई आपकी लाइफ में रोशनी का काम किया हो!

क्यों मनाया जाता है टीचर डे....

टीचर डे क्यों मनाया जाता है, इससे आप सभी अच्छे से रूबरू होंगे, फिर भी आपको बताती हूँ!

सोमवार, 4 सितंबर 2017

मजदूरी वही, अंदाज नया!

भारत के इतिहास पर गौर किया जाए तो बंधुआ मजदूरी का लंबा-चौड़ा इतिहास देखने को मिलता है। प्राचीन समय मे जमीदार बंधुआ मजदूरी करवाते थे, और अब पूंजीपतियों द्वारा इसको नया रूप दे दिया है। जी हाँ, मैं आपका नये नाम से परिचय करवाती हूँ, ये नया नाम है- हिंदी में नौकरी और अंग्रेजी में जॉब! आप सभी इस नाम से भलीभांति परिचित ही हैं, इसलिए इसका विवरण करने की कोई जरूरत नहीं है! खैर ये फिजूल की बात छोड़कर मुद्दे की बात करते है!


हां तो मैं बात कर रही हूं मजदूरी की! बंधुआ मजदूरी को समझना है तो कलर्स पर 'उड़ान' नामक कार्यक्रम का संचालन होता है, उसके शुरू के एपिसोड देखेंगे तो आपको बंधुआ मजदूरी का अर्थ समझ आ जायेगा!