रविवार, 20 अगस्त 2017

'प्रभु' आपकी कृपा कब होगी?

एक के बाद रेल हादसों से यही सवाल खड़ा होता है कि आखिर कब होगी प्रभु की कृपा। जी हां, मैं बात कर रही हूं रेल मंत्री सुरेश प्रभु की, प्रभु जी आखिर कब हादसों पर लगाम लगाने में आप कामयाब हो पाएंगे? रेल हादसे क्यों होते, क्यों गवांनी पड़ती है यात्रियों को अपनी जान? इन्ही तमाम सवालों के बीच में एक बड़ा सवाल यह भी खड़ा होता है कि क्या वाकई रेलवे यात्रियों की सुरक्षा करने में नाकाम रही है?

वैसे तो रेलवे के इतिहास पर अगर गौर किया जाए तो बड़े-बड़े हादसों का जिक्र मिलता है। रेलवे के इतिहास के हादसों पर बाद में चर्चा करेंगे, उससे पहले हाल ही में हुए रेलवे हादसा पर नजर डालते है। जी हां, आपको बता दूं कि कलिंग-उत्कल एक्सप्रेस शनिवार शाम मुजफ्फरनगर के खतौली में हादसे का शिकार हो गई।उत्कल एक्सप्रेस की कई बोगियों के पटरी से उतरने की वजह से यह हादसा हुआ है।हादसें में कई लोगों की मौत होने की खबर के साथ ही भारी संख्या में लोग घायल हो चुके है। यह एक बड़ा हादसा है, हादसा क्यों हुआ, इसके पीछे अभी तक बताये जाने वाले कारणों में से एक कारण यह भी बताया जा रहा कि यह हादसा प्रशासनिक लापरवाही की वजह से हुई है।

मंगलवार, 15 अगस्त 2017

जानियें, क्यों बढ़ रही है बेरोजगारी?

वर्तमान समय में भारत विश्व की सबसे ज्यादा तेजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्था है। इसके बावजूद देश का युवा बेरोज़गार घूम रहा है और उसे नौकरी के लिए दर-दर की ठोकरे  खानी पड़ रही है। सरकारी नौकरी की तो बात ही छोड़िये जनाब, लोगों को निजी कंपनियों में नौकरी पाने में भी काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इतना ही नहीं, योग्यता होने के बावजूद उन्हें रिजेक्ट कर दिया जाता है या कार्य के अनुसार वेतन नहीं दिया जाता है। आखिर लोगों को नौकरी के लिए इतनी परेशानियों का सामना क्यों करना पड़ रहा है? आइये इसके एक पहलू पर नजर डालते है!

    एक सर्वे के मुताबिक देश में अब युवाओं ने नौकरी ढूंढ़ना छोड़ दिया है। इसका सबसे बड़ा कारण कार्य के मुताबिक वेतन नहीं मिलना है। कंपनियां लोगों में कौशल तो चाहती है, लेकिन उन्हे उनके कौशल के अनुसार वेतन नहीं देना चाहती। यदि किसी वेबसाइट पर जाकर किसी छोटी नौकरी का विज्ञापन देखे तो पाएंगे कि उस नौकरी के लिए एक व्यक्ति में पचास तरह के कौशल और तीन से पांच साल के अनुभव की मांग की जाएगी। लेकिन वेतन के नाम पर केवल आठ से दस हजार रूपये दिए जाएंगे, जबकि सरकार के अनुसार एक व्यक्ति की प्रतिमाह न्यूनतम आय 15 हजार होनी चाहिए। कुछ लोग अधिक समय से नौकरी ना मिलने के कारण  कम वेतन में काम करने को तैयार हो जाते है।

मंगलवार, 1 अगस्त 2017

तो क्या शरद बनेंगे लालू के मसीहा?

बिहार की राजनीतिक दंगल की गाड़ी सरकार टूटने से, सरकार बनने से होते हुए, अब कयासों पर आ चुकी है। जी हां, पिछले कुछ दिनों में बिहार की राजनीति में जो कुछ भी घटित हुआ, उससे पूरा देश भलीभांति परिचित है। सीएम नीतीश के इस्तीफे से लेकर बीजेपी संग सरकार बनाने से जहां एक तरफ सियासी गलियारों में खलबली मच गई थी, वहीं जदयू के वरिष्ठ नेता शरद यादव की चुप्पी सभी को खटकने लगी थी।

सत्ताधारी पार्टी से लेकर विपक्ष की निगाहें भी राजनीति के इस  दिग्गज खिलाड़ी पर टिकी हुई थी। जहां एक तरफ बिहार की नयी-नवेली सरकार शरद यादव को अपने खेमे में बता रही थी, तो वही दूसरी तरफ राजद प्रमुख लालू यादव ने तो दावा भी कर दिया था कि शरद यादव उनके साथ है। इन सभी बातों को मद्देनजर रखते हुए आखिरकार आज शरद यादव ने बिहार की राजनीति में आये भूचाल पर अपनी चुप्पी तोड़ ही दी।