रविवार, 20 अगस्त 2017

'प्रभु' आपकी कृपा कब होगी?

एक के बाद रेल हादसों से यही सवाल खड़ा होता है कि आखिर कब होगी प्रभु की कृपा। जी हां, मैं बात कर रही हूं रेल मंत्री सुरेश प्रभु की, प्रभु जी आखिर कब हादसों पर लगाम लगाने में आप कामयाब हो पाएंगे? रेल हादसे क्यों होते, क्यों गवांनी पड़ती है यात्रियों को अपनी जान? इन्ही तमाम सवालों के बीच में एक बड़ा सवाल यह भी खड़ा होता है कि क्या वाकई रेलवे यात्रियों की सुरक्षा करने में नाकाम रही है?

वैसे तो रेलवे के इतिहास पर अगर गौर किया जाए तो बड़े-बड़े हादसों का जिक्र मिलता है। रेलवे के इतिहास के हादसों पर बाद में चर्चा करेंगे, उससे पहले हाल ही में हुए रेलवे हादसा पर नजर डालते है। जी हां, आपको बता दूं कि कलिंग-उत्कल एक्सप्रेस शनिवार शाम मुजफ्फरनगर के खतौली में हादसे का शिकार हो गई।उत्कल एक्सप्रेस की कई बोगियों के पटरी से उतरने की वजह से यह हादसा हुआ है।हादसें में कई लोगों की मौत होने की खबर के साथ ही भारी संख्या में लोग घायल हो चुके है। यह एक बड़ा हादसा है, हादसा क्यों हुआ, इसके पीछे अभी तक बताये जाने वाले कारणों में से एक कारण यह भी बताया जा रहा कि यह हादसा प्रशासनिक लापरवाही की वजह से हुई है।
रेलवे के इतिहास के ब्लैक-डे: 
रेलवे के इतिहास के ब्लैक-डे, जिसे शायद ही कोई याद करना चाहेगा क्योंकि इनसे जख्म हरे हो जाते है! बीते 20 सालों में रेलवे के लिए ये दिन बन गए ब्लैक-डे! 
20 नवंबर, 2016- जी हां, यह हादसा ज्यादा पुराना नहीं है, पिछले साल का ही है। इस दिन उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले के पुखरायां में इंदौर-पटना एक्सप्रेस के 14 डिब्बे पटरी से उतरे, 100 से ज्यादा यात्रियों की मौत जबकि 200 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। 
28 मई, 2010- पश्चिम बंगाल के पश्चिमी मिदनापुर जिले में नक्सली हमले में ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस पटरी से उतरी। इस हादसे में करीब170 लोगों की मौत हुई थी। 
20 सितंबर 2010-यह इस साल का दूसरा बड़ा हादसा है। मध्य प्रदेश के शिवपुरी में ग्वालियर इंटरसिटी एक्सप्रेस एक मालगाड़ी से टकराई।इस टक्कर में 33 लोगों की जान चली गई। 
21 अप्रैल 2005- गुजरात में वडोदरा के पास साबरमती एक्सप्रेस और एक मालगाड़ी की टक्कर में करीब 17 लोगों की मौत हो गई थी। 
09 सिंतबर, 2002- बिहार के औरंगाबाद जिले में हावड़ा-दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस के 14 डिब्बे धावी नदी में गिरे, 100 से ज्यादा यात्रियों की मौत हो गयी थी। 
02 अगस्त, 1999- असम के गायसल में करीब 2,500 यात्रियों को लेकर जा रही दो ट्रेनें आपस में टकरायीं, लगभग 250 लोगों की मौत हो गयी थी। 
26 नवंबर, 1998- पंजाब के खन्ना में जम्मू-तवी-सियालदह एक्सप्रेस फ्रंटियर मेल के पटरी से उतरे डिब्बों से टकराने पर कम से कम 212 लोगों की मौत हुई थी। 
14 सितंबर, 1997- मध्यप्रदेश के बिलासपुर में अहमदाबाद-हावड़ा एक्सप्रेस के पांच डिब्बे नदी में गिरे, 81 लोगों की मौत। 
तो यह थे रेलवे के ब्लैक डे में से कुछ दिन और इस दिन होने वाली घटनाएं। इसके अलावा भी कई हादसें रेलवे के इतिहास में दर्ज है।

 चलिये अब बात करते है, वर्तमान हादसे की। मीडिया में आई खबरों पर गौर किया जाए तो मामलें में अभी तक यही सामने आया है कि जिस जगह यह हादसा हुआ, वहाँ पर रेलवे का कार्य प्रगति पर था, कार्य प्रगति से आशय यह है कि पटरियों पर मरम्मत का कार्य चल रहा था, लेकिन किसी ने इस बात की सूचना ड्राइवर को नहीं दी, जिसकी वजह यह बड़ा हादसा हुआ। अगर हादसे की वजह लापरवाही ही है, तो यह रेलवे प्रशासन के लिए बड़े ही शर्म की बात है। और अगर यह लापरवाही है तो ऐसी लापरवाहियां कब रुकेंगी? हालांकि यूपी की योगी सरकार ने हादसें में शिकार हुए लोगों के लिए मुआवजे का ऐलान किया, और राहत बचाव का कार्य प्रगति पर है। प्रभु जी, हादसें के शिकार हुए लोगों के जिम्मेदार कौन है, हादसे में हुई मौत का कर्ज कैसे चुकाएंगे आप? क्या इस बार भी हर बार की तरह झूठ दिलासा ही दिलाया जाएगा या फिर भविष्य में ऐसे हादसे फिर न दोहराये इसके लिए आप कोई सख्त कदम उठाएंगे? देश की जनता का सवाल तो यही है आपसे कि 'आप की कृपा' रेलवे की सुरक्षा-व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिये कब होगी? या फिर मुआवजा से इस हादसें पर पर्दा डाल दिया जाएगा या इस पर बड़ी कार्रवाई की जाएगी? यह तो खैर वक्त ही बतायेगा। रेलवे के प्रभु जी आपसे अनुरोध है कि आप जल्द से जल्द इन हादसों को रोकने के लिए कोई बड़ा कदम उठाए, ताकि यात्री रेलवे में सफर करते हुए खुद को सुरक्षित महसूस करे!

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