बिहार की राजनीतिक दंगल की गाड़ी सरकार टूटने से, सरकार बनने से होते हुए, अब कयासों पर आ चुकी है। जी हां, पिछले कुछ दिनों में बिहार की राजनीति में जो कुछ भी घटित हुआ, उससे पूरा देश भलीभांति परिचित है। सीएम नीतीश के इस्तीफे से लेकर बीजेपी संग सरकार बनाने से जहां एक तरफ सियासी गलियारों में खलबली मच गई थी, वहीं जदयू के वरिष्ठ नेता शरद यादव की चुप्पी सभी को खटकने लगी थी।
सत्ताधारी पार्टी से लेकर विपक्ष की निगाहें भी राजनीति के इस दिग्गज खिलाड़ी पर टिकी हुई थी। जहां एक तरफ बिहार की नयी-नवेली सरकार शरद यादव को अपने खेमे में बता रही थी, तो वही दूसरी तरफ राजद प्रमुख लालू यादव ने तो दावा भी कर दिया था कि शरद यादव उनके साथ है। इन सभी बातों को मद्देनजर रखते हुए आखिरकार आज शरद यादव ने बिहार की राजनीति में आये भूचाल पर अपनी चुप्पी तोड़ ही दी।

जैसे ही जदयू के दिग्गज नेता शरद यादव की चुप्पी टूटी, वैसे ही राजनीति गलियारों में कयासों की लड़ियाँ लगने लगी। आपको बता दूं कि बिहार की राजनीति पर दिग्गज नेता शरद यादव ने अपने बयान में कहा कि "महागठबंधन टूटने का अफसोस, नीतीश के फैसले से हूं नाराज।" शरद यादव के इस बयान से यह साफ जाहिर होता है कि शरद नहीं चाहते थे बीजेपी का साथ! शरद यादव के इस बयान से जहां एक तरफ नीतीश को झटका लग सकता है, वहीं दूसरी तरफ लालू के लिए राहत की खबर हो सकती है।
महागठबंधन के टूटने से लालू भी पूरी तरह से टूटते नजर आ रहे है। साथ ही लालू को इस मामले में अदालत से उम्मीद थी, लेकिन आज अदालत ने भी लालू के उम्मीदों पर पानी फेर दिया। दरअसल, राजेडी ने अदालत में नई सरकार के खिलाफ याचिका दायर किया था, याचिका में आरजेडी ने यह दावा किया था कि सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद उन्हें सरकार बनाने का मौका नहीं दिया गया, लेकिन अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया। ऐसे में शरद यादव के बयान से लालू को थोड़ी सी राहत तो जरूर मिली होगी, लेकिन क्या शरद होंगे लालू के साथ उनके मसीहा बनकर?
शरद यादव के पुराने बयानों पर गौर किया जाए तो शरद हमेशा से यही कहते आये है कि उनकी लड़ाई बीजेपी और मोदी से है, तो ऐसे में क्या शरद लालू के लिए मसीहा बनेंगे? या फिर शरद अपने सिद्धांतों को झुकाकर, नीतीश से नाराजगी दूर कर, बीजेपी का दामन थाम लेंगे ?
फिलहाल शरद के बयानों पर गौर किया जाए तो, उससे यही स्पष्ट होता है कि शरद लालू के मसीहा बन सकते है। बहरहाल, यह तो खैर वक्त ही बताएगा कि शरद लालू के लिए मसीहा बनेंगे या फिर लालू की नैया को डुबोकर, नीतीश संग हो जाएंगे।
सत्ताधारी पार्टी से लेकर विपक्ष की निगाहें भी राजनीति के इस दिग्गज खिलाड़ी पर टिकी हुई थी। जहां एक तरफ बिहार की नयी-नवेली सरकार शरद यादव को अपने खेमे में बता रही थी, तो वही दूसरी तरफ राजद प्रमुख लालू यादव ने तो दावा भी कर दिया था कि शरद यादव उनके साथ है। इन सभी बातों को मद्देनजर रखते हुए आखिरकार आज शरद यादव ने बिहार की राजनीति में आये भूचाल पर अपनी चुप्पी तोड़ ही दी।

जैसे ही जदयू के दिग्गज नेता शरद यादव की चुप्पी टूटी, वैसे ही राजनीति गलियारों में कयासों की लड़ियाँ लगने लगी। आपको बता दूं कि बिहार की राजनीति पर दिग्गज नेता शरद यादव ने अपने बयान में कहा कि "महागठबंधन टूटने का अफसोस, नीतीश के फैसले से हूं नाराज।" शरद यादव के इस बयान से यह साफ जाहिर होता है कि शरद नहीं चाहते थे बीजेपी का साथ! शरद यादव के इस बयान से जहां एक तरफ नीतीश को झटका लग सकता है, वहीं दूसरी तरफ लालू के लिए राहत की खबर हो सकती है।
महागठबंधन के टूटने से लालू भी पूरी तरह से टूटते नजर आ रहे है। साथ ही लालू को इस मामले में अदालत से उम्मीद थी, लेकिन आज अदालत ने भी लालू के उम्मीदों पर पानी फेर दिया। दरअसल, राजेडी ने अदालत में नई सरकार के खिलाफ याचिका दायर किया था, याचिका में आरजेडी ने यह दावा किया था कि सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद उन्हें सरकार बनाने का मौका नहीं दिया गया, लेकिन अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया। ऐसे में शरद यादव के बयान से लालू को थोड़ी सी राहत तो जरूर मिली होगी, लेकिन क्या शरद होंगे लालू के साथ उनके मसीहा बनकर?
शरद यादव के पुराने बयानों पर गौर किया जाए तो शरद हमेशा से यही कहते आये है कि उनकी लड़ाई बीजेपी और मोदी से है, तो ऐसे में क्या शरद लालू के लिए मसीहा बनेंगे? या फिर शरद अपने सिद्धांतों को झुकाकर, नीतीश से नाराजगी दूर कर, बीजेपी का दामन थाम लेंगे ?
फिलहाल शरद के बयानों पर गौर किया जाए तो, उससे यही स्पष्ट होता है कि शरद लालू के मसीहा बन सकते है। बहरहाल, यह तो खैर वक्त ही बताएगा कि शरद लालू के लिए मसीहा बनेंगे या फिर लालू की नैया को डुबोकर, नीतीश संग हो जाएंगे।
राजनीति में कुछ भी अकस्मात नही होता। अगर कुछ होता है तो इस पर शर्त लगाई जा सकती है कि इसे ऐसे ही योजनाबद्ध किया गया था।
जवाब देंहटाएं-फैंकलीन डी रूजवेल्ट