मंगलवार, 15 अगस्त 2017

जानियें, क्यों बढ़ रही है बेरोजगारी?

वर्तमान समय में भारत विश्व की सबसे ज्यादा तेजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्था है। इसके बावजूद देश का युवा बेरोज़गार घूम रहा है और उसे नौकरी के लिए दर-दर की ठोकरे  खानी पड़ रही है। सरकारी नौकरी की तो बात ही छोड़िये जनाब, लोगों को निजी कंपनियों में नौकरी पाने में भी काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इतना ही नहीं, योग्यता होने के बावजूद उन्हें रिजेक्ट कर दिया जाता है या कार्य के अनुसार वेतन नहीं दिया जाता है। आखिर लोगों को नौकरी के लिए इतनी परेशानियों का सामना क्यों करना पड़ रहा है? आइये इसके एक पहलू पर नजर डालते है!

    एक सर्वे के मुताबिक देश में अब युवाओं ने नौकरी ढूंढ़ना छोड़ दिया है। इसका सबसे बड़ा कारण कार्य के मुताबिक वेतन नहीं मिलना है। कंपनियां लोगों में कौशल तो चाहती है, लेकिन उन्हे उनके कौशल के अनुसार वेतन नहीं देना चाहती। यदि किसी वेबसाइट पर जाकर किसी छोटी नौकरी का विज्ञापन देखे तो पाएंगे कि उस नौकरी के लिए एक व्यक्ति में पचास तरह के कौशल और तीन से पांच साल के अनुभव की मांग की जाएगी। लेकिन वेतन के नाम पर केवल आठ से दस हजार रूपये दिए जाएंगे, जबकि सरकार के अनुसार एक व्यक्ति की प्रतिमाह न्यूनतम आय 15 हजार होनी चाहिए। कुछ लोग अधिक समय से नौकरी ना मिलने के कारण  कम वेतन में काम करने को तैयार हो जाते है।


इसके अलावा कंपनियां फ्रेशर को नौकरी ही नहीं देना चाहती। यदि किसी भी फ्रेशर को नौकरी दी ही नहीं जाएगी तो वह एक्सपीरीयंस कहां से लाएगा?  युवा जब नौकरी की तलाश में किसी कंपनी  के कार्यालय में जाते है तो उन्हे अनुभवहीन बता दिया जाता है। उनसे कहा जाता है कि आप तीन महीने ट्रेनिंग कीजिए और काम सीखिए। हमे आपका काम पसंद आया तो हम आपको नौकरी दे देंगे। ट्रेनिंग के दौरान लोगों से नौकरी के अनुसार ही पूरा काम कराया जाता है, लेकिन इसके लिए उन्हे वेतन नहीं दिया जाता है। पत्रकारिता की दुनिया भी इससे अछूती नहीं रही है। पत्रकारिता मे युवाओं की नौकरी को लेकर बहुत सी चिंताएं व्यक्त की जाती है। मीडिया द्वारा सर्वे किए जाते है कि देश में कितनी बेरोज़गारी है लेकिन मीडिया कभी खुद को आइने में नहीं देखता। सच्चाई तो यह है कि वर्तमान समय में मीडिया भी इस प्रकार के हथकंडे अपना रहा है और युवाओं से ट्रेनिंग के नाम पर बिना वेतन के कार्य करा रहा है।

     अब आप में से कुछ लोग यह भी कहेंगे कि ट्रेनिंग तो लेना ही पड़ता है, बिना ट्रेनिंग के कोई नौकरी नहीं मिलती है। चलिये ठीक है, मान लिया आपकी बात लेकिन जनाब हालात तो यह है कि लोग इस उम्मीद में बिना वेतन के तीन महीने तक काम करने को तैयार है कि इसके बाद उन्हे नौकरी मिल जाएगी। लेकिन तीन महीने बाद व्यक्ति के काम से असंतुष्टि दिखा कर उसे निकाल दिया जाता है और उसकी जगह किसी दूसरे व्यक्ति को ट्रेनिंग पर रख लिया जाता है। साथ ही ट्रेनिंग के बावजूद भी आपको यह कह कर रिजेक्ट कर दिया जाता है कि आप अभी फ्रेशर है, हमें अनुभवी लोगों की जरूरत है, यह कहाँ तक मुनासिफ है? इतना ही नहीं, जिस कंपनी में आप ट्रेनिंग लेते है, उसके बाद आप नौकरी मांगते है, तो यह कहकर टाल देते है कि अभी वेकैंसी नहीं, इसका तो यही अर्थ निकलता है कि आजकल की कंपनियों को तो अपने द्वारा दी गई ट्रेनिंग पर ही भरोसा नहीं होता है, तो दूसरे फ्रेशर्स को जॉब क्या खाक देंगे!


अरे हाँ, बेरोजगारी का दूसरा सबसे बड़ा कारण तो रेफ्रेंस है! भारतीय भाषा में कुछ लोग इसे चापलूसी भी कहते है, इंडिया में चापलूसी का डंक दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है, इसे ज्यादा बताने की जरूरत नहीं है, क्योंकि आप सभी इससे भलीभाँति अवगत होंगे! हाँ तो चापलूसी की ही देन है कि योग्य उम्मीदवार नौकरी से वंचित रह जाते है और चापलूसी करने वाले महारथी को नौकरी मिल जाती है!

चापलूसी और ट्रेनिंग का यह सिलसिला इसी तरह चलता रहा तो बेरोजगारी का आलम यूँही बना रहेगा!  बेरोजगारी की दुनिया से खुद को बाहर निकालने के लिए आपको ही जागरूक होना पड़ेगा और इसके लिए आपको को यह समझना ज़रूरी है कि कंपनी आपकी मजबूरी का गलत फायदा उठा रही है। जब तक आप बिना वेतन के कार्य करते रहेंगे, तब तक कंपनियां आपको नौकरी नहीं देंगी! साथ ही आने वाले समय में नौकरी मिलना और भी मुश्किल हो जाएगा!

1 टिप्पणी:

  1. वर्तमान में ये हाल है, भविष्य की कल्पना!! ज्योतिष शास्त्र भी असफल हो जाएगा।

    जवाब देंहटाएं