हिन्दी के लोकप्रिय उपन्यासकारों में से एक वेद प्रकाश शर्मा का बीते शुक्रवार को फेफड़े में इन्फेक्शन के कारण निधन हो गया... शर्मा जी लम्बे समय से इस बीमारी से जूझ रहे थे... उन्होंने हिन्दी जगत में अपने उपन्यासों से तहलका मचा दिया था... वेदप्रकाश जी ने अपने जीवनकाल में 176 उपन्यास और कई पटकथाएं लिखी... अपनी उच्च लेखनशैली से इन्होंने भारतीयों समेत विदेशियों का भी दिल जीता... अपने तेज-तर्रार लेखन से हिन्दी जगत में इन्होंने सालो तक राज किया... इनके लोकप्रिय उपन्यासकारों में से एक "वर्दी वाला गुंडा" आज भी लोगों के बीच प्रचलित है... आकड़ो के मुताबिक इस उपन्यास की लगभग 8 करोड़ प्रतियां बिक चुकी है....
उपन्यासकार वेद प्रकाश शर्मा का जन्म 6 जून, 1955 में यूपी के मेरठ में हुआ था... वेद प्रकाश शर्मा को लिखने का शौक बचपन से ही था... धीरे-धीरे ये शौक जुनूनियत में तब्दील हो गया...शुरुआती दौर में वेदप्रकाश दूसरों के नाम से लिखते थे... कुछ समय बाद इन्होंने अपने नाम से लेखन कार्य शुरू किया और इन्हें आपार सफलताएं भी मिली... उस दौर से आज के दौर तक वेदप्रकाश युवा पीढ़ी में लोकप्रिय रहें... इनके लोकप्रिय उपन्यासों में 'वर्दी वाला गुंडा', 'बहु मांगे इंसाफ', 'लल्लू' और 'बीवी का नशा' आदि प्रमुख है... इनके कुछ उपन्यासों पर फिल्में भी बन चुकी है... उपन्यास 'बहु मांगे इंसाफ' पर बहु की आवाज और 'लल्लू' पर सबसे बड़ा खिलाडी नामक फिल्मे बनी... इन्होंने उपन्यास के अलावा तकरीबन आधा दर्जन फिल्मों की पटकथा भी लिखी...
इनकी लोकप्रियता को इसी बात से आंका जा सकता है कि जब इनके उपन्यास बाजार में आते थे तो कुछ घण्टों में ही इनके उपन्यासो की कॉपियां बिक जाती थी... लोग कतारबद्ध होकर इनके उपन्यासो को खरीदते थे... वैसे तो हिन्दी जगत में अनेक उपन्यासकार थे, है और रहेंगे... लेकिन वेद प्रकाश शर्मा का नाम हिन्दी जगत में अग्रणी रहेगा
उपन्यासकार वेद प्रकाश शर्मा का जन्म 6 जून, 1955 में यूपी के मेरठ में हुआ था... वेद प्रकाश शर्मा को लिखने का शौक बचपन से ही था... धीरे-धीरे ये शौक जुनूनियत में तब्दील हो गया...शुरुआती दौर में वेदप्रकाश दूसरों के नाम से लिखते थे... कुछ समय बाद इन्होंने अपने नाम से लेखन कार्य शुरू किया और इन्हें आपार सफलताएं भी मिली... उस दौर से आज के दौर तक वेदप्रकाश युवा पीढ़ी में लोकप्रिय रहें... इनके लोकप्रिय उपन्यासों में 'वर्दी वाला गुंडा', 'बहु मांगे इंसाफ', 'लल्लू' और 'बीवी का नशा' आदि प्रमुख है... इनके कुछ उपन्यासों पर फिल्में भी बन चुकी है... उपन्यास 'बहु मांगे इंसाफ' पर बहु की आवाज और 'लल्लू' पर सबसे बड़ा खिलाडी नामक फिल्मे बनी... इन्होंने उपन्यास के अलावा तकरीबन आधा दर्जन फिल्मों की पटकथा भी लिखी...
इनकी लोकप्रियता को इसी बात से आंका जा सकता है कि जब इनके उपन्यास बाजार में आते थे तो कुछ घण्टों में ही इनके उपन्यासो की कॉपियां बिक जाती थी... लोग कतारबद्ध होकर इनके उपन्यासो को खरीदते थे... वैसे तो हिन्दी जगत में अनेक उपन्यासकार थे, है और रहेंगे... लेकिन वेद प्रकाश शर्मा का नाम हिन्दी जगत में अग्रणी रहेगा

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