सोमवार, 20 फ़रवरी 2017

यूपी का चुनावी घमासान



यूपी में चुनावी माहौल का घमासान चरम पर चुका है। सत्ताधारी और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। राजनिति के गलियारों से आरोप-प्रत्यारोप का घिनोना खेल खेला जा रहा है। यूपी के चौथे चरण के चुनाव प्रचार में ही राजनीति के धुरंधर अपने असली रंग में नजर आने लगे है। चुनावी रैलियां तो ऐसी लग रही है जैसे मैदान--जंग का ऐलान किया जा रहा हो " देखे जरा किसमे है कितना दम" ये गीत यूपी के चुनावी माहौल के लिए बिल्कुल सटीक है।
  प्रदेश में विकास करना, भ्र्ष्टाचार से मुक्त कराना ये सारी बातें तो जैसे सदियों पुरानी हो चुकी है। कोई भी राजनीतिक दल इन जरूरी बातों पर ध्यान नहीं दे रहा है। कौन कहे इन नेताओं से कि युवाओं को रोजगार, गरीबों को दो वक्त की रोटी और महिलाओं को सुरक्षा चाहिए। लेकिन ये राजनीति के खिलाड़ी इन मुद्दों को भूल कर आपसी रंजिश को प्राथमिकता देने में लगे हुए है।। कब कौन क्या बोल जाए, कब सियासी गलियारे में नया मोड़ जाए इस बात से सभी अंजान है। बात चाहे बीजेपी के स्टार प्रचारकों की जाए या  सपा के स्टार प्रचारकों की जाए या फिर अन्य विपक्षी पार्टियों के प्रचारकों की जाए, इन सभी नेताओं के बोल बोखलाए हुए भेड़िए की तरह हो गए है।
इस चुनाव में अन्य चुनाव की तरह प्रदेश में भेदभाव या कहे कि भड़काने की राजनीति का नजारा भी देखने को मिला। मसलन के तौर पर यूपी के फतेहपुर की रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्ताधारी पार्टी पर राज्य में भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार क़ब्रिस्तान बनाती है तो श्मशान का भी ध्यान रखे। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि यदि रमज़ान में बिजली दी जाती है तो दिवाली में भी बिजली दी जानी चाहिए। वहीं दूसरी तरफ बसपा सत्ताधारी सरकार को दलितों का विरोधी बताती नहीं थक रही है। इतना ही नहीं भेदभाव की इस गंदी राजनीति में सत्ताधारी पार्टी यानि सपा भी दूसरी पार्टियों पर हल्ला बोलने में पीछे नहीं है।
भारत के सबसे बड़े राज्य में जहां इन नेताओं को एकता की मिसाल देनी चाहिए थी जिससे देश में आपसी भाईचारा बढ़ने में मदद मिले, लेकिन वहां ये राजनीति के दिग्गज देश-प्रदेश की जनता को भड़काने का काम करने से बाज नहीं रहे है। धिक्कार है ऐसे पार्टियों पर जो अपने फायदे के लिए देश की अखंडता को कमज़ोर करने का काम कर रही है। जरा तो शर्म करो मान्यवर नेतागण! क्या आपने कभी सोचा है कि आप आने वाली पीढ़ियों को विरासत में क्या दे रहे हो? अगर नहीं सोचा है तो अब भी वक्त है कि गंदी राजनीति के गलियारों से निकल कर साफ़ सुथरा भारत बनाने की ओर रुख कीजिए। सभी पार्टियां महज अपना उल्लू सीधा करने के लिए किस हद तक जा सकती है, ये देश-प्रदेश की जनता से छुपा नहीं है। इसलिए जनता को इनकी बातों में ना आकर एक ऐसे भारत का निर्माण करना चाहिए जिसमें सभी लोग मिल-जुल कर एकता के साथ रहे।

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