युवाओं का शौर्य, पराक्रम एवं साहस ही राष्ट्र की एकता, अखंडता व सुरक्षा
का सर्वोत्तम आधार है। युवाओं के शौर्य एवं तेज़ के बिना राष्ट्रीय एकता,
अखंडता की कल्पना करना संभव नही है; क्योंकि राष्ट्रीय एकता की कल्पना तो
की जा सकती है, परंतु इसे क्रियान्वित करने के लिए युवाओं की ही आवश्यकता
पड़ती है। इसके लिए केवल वे ही युवा जिम्मेदार नहीं है, जो राष्ट्रीय सेवाओं
में कार्यरत हैं, बल्कि वे भी हैं, जो देश के अलग अलग हिस्सों में अलग अलग
कार्यों में संलग्न हैं। जो जहां है, वहीं उनकी अपनी विशेष भूमिका है। देश
का प्रत्येक युवा अपने ढंग से अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए कार्य करे तो
यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
युवा अपने काम को ईमानदारी से करते हुए जनसेवा, राष्ट्रीय
सौहार्द, भ्रष्टाचार, अनाचार, अनीति से संघर्ष जैसे कितने ही महत्वपूर्ण
कार्य संपन्न कर सकते है।
ऐसा करने के लिए उन्हें बस, अपनी जिम्मेदारी का एहसास होना चाहिए। इसके अभाव में युवा होने का कोई अधिक अर्थ नही होता है, परंतु कोई एक युवा भी अपने होने का, अपनी उपस्थिति का एहसास करा दे तो वही औरोँ के लिए प्रेरणाप्रद बन जाता है।
ऐसा करने के लिए उन्हें बस, अपनी जिम्मेदारी का एहसास होना चाहिए। इसके अभाव में युवा होने का कोई अधिक अर्थ नही होता है, परंतु कोई एक युवा भी अपने होने का, अपनी उपस्थिति का एहसास करा दे तो वही औरोँ के लिए प्रेरणाप्रद बन जाता है।
कई
युवाओं ने ऐसा किया भी है। ऐसे ही एक युवा शौर्य एवं साहस को नमन करने का
मन करता है। आईएएस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल ने रेत माफियाओं के विरुद्ध
ऐसी कार्यवाही की कि सभी उनसे डरने - घबराने लगे। इसी कारण उनपर जानलेवा
हमला हुआ, लेकिन अपनी जान की परवाह किए बगैर उन्होंने ग्रेटर नोएडा में
यमुना नदी के पास अवैध खनन करने वालों पर कड़ी कार्यवाही की। युवा
दुर्गाशक्ति नागपाल ने जिस साहस और जिम्मेदारी के साथ अपने कार्य का
निर्वहन किया, वह युवाओं के लिए एक प्रेरणा है।
इस
संदर्भ में जम्मू के उधमपुर जिले के सिमरोली गाँव के दो युवा राकेश शर्मा
एवं विक्रम जीत की साझेदारी एवं साहस ने ऐसा कर दिखाया, जिसे देखकर कोई भी
हतप्रभ ही जाए। लश्करे तोयबा के दो आतंकवादी मुहम्मद नावेद और नोयन एलियास
मोमीन सीमा पार करके दहशत फैलाने जम्मू आ गए थे। राकेश और विक्रमजीत ने
अपनी जान की परवाह किये बगैर राष्ट्र के दुश्मन आतंकवादी को पकड़ लिया और
जांबाजी की मिसाल पेश की। उनके इसी साहस के कारण 13 अगस्त 2015 को एन्टी
टेररिस्ट फ्रंट मुम्बई नें दोनो जांबाजों को छत्रपति शिवाजी साहस पुरस्कार
से नवाजा।
आज स्वार्थ और सत्ता के लिए मारा-मारी मची हुई है। इस दौर में
कितने ही तिकड़म, कुचक्र व षड्यंत्र रचाए जाते हैं। इन षड्यंत्रकारियों को
केवल अपनी चिंता है, राष्ट्र की कई चिंता नहीं है। ऐसे लोगों के कौरवी
कुचक्र को ध्वस्त करना केवल युवा पराक्रम का कार्य है। युवा ही समय-सर्प की
गति की मनचाहा मोड़ देकर उसे विषहीन कर सकता हैं। युवाओं का शौर्य एवं तेज
ही इस असम्भव कार्य को संभव कर सकता है। राष्ट्रीय कर्तव्य को पूरा करने के
लिए आज के युवाओं को आगे आना होगा। युवाओं की बलिदानी भावना से ही राष्ट्र
में शांति स्थापित होगी और देश समृद्ध होगा। प्रत्येक युवा को राष्ट्रीय
कर्तव्य के लिए स्वयं प्रेरित होकर दूसरों को भी प्रेरित करना चाहिए।
लेखक: आदर्श शुक्ला (adarshshukla602273@gmail.com)

सराहनीय लेख..भारत आने वाले आगामी जनगणना विश्व का सबसे युवा देश हो जाएगा। युवाओं में विकास, परिवर्तन और बदलाव आदि के लिए एक सकारात्मक चिंगारी होती है। यदि इस चिंगारी से देश को रोशन करने के लिए सत्ता ने उचित साधन उपलब्ध नहीं कराया तो एक समय ये चिंगारी ऐसे भयावह तरीके से फैलेगी जिसकी लपटों में झुलस कर पूरा देश खक हो जाएगा। इस लिए सत्ता को चाहिए कि युवा के लिए अधिक से अधिक रोजगार उपलब्ध करके उनके ऊर्जा का देश के उन्नति और विकास में सकारात्मक तरीके से हो पाए
जवाब देंहटाएंसत्ता साधन समय समय उपलब्ध कराती रहती पर ध्यान रहे युवाओं में भटकाव न होने पाए जो भावनात्मक होती है। यदि भावनात्मक संतृष्टी की तलाश में भटकते ये युवा अतृप्त हैं तो ये किसी और को तृप्ति कैसे पहुँचा सकते है?
जवाब देंहटाएंआज के युवाओं के अँधेरे जीवन में प्रकाश फैलाने की आवश्यकता है। विषबेल बहुत फैल चुकी है। अब उसकी सफाई की पुरजोर आवश्यकता है। हम अपने साथ दूसरों को भी उठाएँ एवं आगे बढ़ाएं। वर्तमान समय की युवा पीढ़ी से यही माँग है।