गुरुवार, 17 दिसंबर 2015

फेसबुक का चस्का


        फेसबुक का चस्का आजकल हर वर्ग पर सवार है। खाना खाए या न खाए पर फेसबुक पर जरूर आनलाइन आना है। फेसबुक का भूत इतना भयानक है कि इसे कोई ज्योतिषी भी इस भूत को नहीं उतार सकते है। दिन हो या रात इसका इस्तेमाल करने वाले को कुछ भी नहीं सूझता है। अगर उन्हे कुछ दिखता है तो वह मात्र फेसबुक है। जैसे पानी के बिना इंसान नहीं रह पाता है ठीक उसी तरह आजकल फेसबुक के बिना लोगों का रहना मुश्किल हो जाता है। आखिर है क्या ये बला जो इसके पीछे लोग दिवाने नजर आते है। कुछ लोगों का कहना है कि इसके द्वारा ढेरों मित्र बनते है और उनसे चीट चैट करने के लिए वे बेताब रहते है । तो कुछ लोगो का मानना है कि यह एक मनोरंजन का साधन है। इसके बारे में लोगों की अलग अलग राय  देखने को मिलती है। हद तो तब होती है जब एक तरफ बंदे कहते है कि उनके पास समय नही है लेकिन फेसबुक पर घंटों बिताने के लिए इफरात समय होता है। कभी कभी तो फेसबुक पर जो लोग हमेशा आनलाइन बैठे रहते है उन्हें देख कर ऐसा लगता है कि उनके पास कोई और काम ही नही बचा है जैसे एक बेरोजगार है।

       पहले लोग अपने दोस्तों से मिलने के लिए बेताब रहते थे लेकिन जब से फेसबुक आया है तब से दुनिया भर से मतलब और खुद का दोस्त भाड़ में गया। उससे मिलने के समय नहीं होता है और फेसबुक के लिए समय ही समय है। एक बार की बात है मेरे फेसबुक पर एक अंजान लड़की की संदेश आया है मैने उससे पूछा क्या आप जानती हो मुझे तब उसने मुझसे कहा फेसबुक का दूसरा नाम ही है जानना जब तक आप बात नही करोगी तब तक कैसे हम एक दूसरे को जानेगें। मुझे ये बात थोड़ी अजीब लगी मैने उसको तुरंत कहा कि माफ कीजिए मुझे आपको जानने मे कोई दिलचस्पी नही है और मैने उसे ब्लाक कर दिया। उस दिन से मै समझ गई कि ये फेसबुक का ही चस्का है जो लोगों को अंजान लोगों से बात करने के लिए प्रेरित करता है। आज फेसबुक अभिव्यक्ति का माध्यम बन गया। इंसान अपनी दिनचर्या मे जो कुछ करता है उसे लोगों के साथ बाँटने के लिए फेसबुक ने मजबूर कर दिया है। अभिव्यक्ति की बैचेनी लोगों को चैन से सोने नही देती है इसका जीता जाता सबूत है - फेसबुक।

        फेसबुक के चस्के से लोग अपना ही नुकसान करते है इस बात की उन्हें भनक तो है पर वे इसे नजरअंदाज करना ही अपने लिए बेहतर मानते है। आजकल तो फेसबुक के जरिए लोग अपराध जैसी क्रूरता को भी अंजाम देते है। फेक आईडी से मनचले लड़कियों को परेशान करते है और शिकायत करने पर उस नाम का कोई शख्स होता ही नहीं है। और तो और कुछ लोग फेसबुक के जरिए किसी की जिन्दगी को नरक से भी बत्तर बना देते है। उदाहरण के लिए किसी लड़की की प्रोफाइल फोटो का गलत इस्तेमाल करके उसकों समाज में मुँह दिखाने के लायक नहीं छोड़ते है। फेसबुक पर ज्यादा समय बिताने से किसी और का कोई नुकसान नहीं होता बल्कि आपका ही नुकसान होता है। समझ नहीं आता है कि आजकल के भागदौड़ से भरी जिन्दगी में लोगों के पास इतना समय कैसे होता है ये जरूर फेसबुक का ही चस्का है। लेकिन समय बिताने के लिए ये एक अच्छा माध्यम है। फोटो, पोस्ट, समाचारों आदि से भरा होता है फेसबुक का टाइमलाइन तो फिर क्यों न चढ़े फेसबुक का चस्का। एक समया था जब लोगों के सुबह की शुरूआत चाय की चुस्कियों से होती थी लेकिन आज वह समय है जब सभी अपने दिन की शुरूआत फेसबुक नामक अनोखी चाय से करते है। कुछ लोग इसलिए फेसबुक को पंसद करते है कि इसमें कितना भी लिखों पर ये नोटबुक की तरह भरता नहीं है।

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